राजस्थान में अब सरकार ने स्कूलों में जाकर वीडियो या फोटोग्राफी करने पर रोक लगा दी है. लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ वीडियो और फोटो पर रोक लगाने से स्कूलों के हालात सुधरेंगे? राजस्थान में पिछले दस सालों में स्कूलों का निर्माण और मरम्मत नहीं होने से करीब 20 हजार स्कूलों की हालत खराब बताई जा रही है. जयपुर में एक छात्र का फोन आया कि उनके स्कूल की क्लासरूम की हालत ऐसी है कि वह कभी भी गिर सकती है. छात्र ने स्कूल आने की अपील की. वहीं, प्रिंसिपल ने सरकार के नए आदेश का हवाला देते हुए स्कूल के खतरनाक हालात की तस्वीरें सामने आने से रोकने की कोशिश की.
जयपुर के सरकारी स्कूल में आधे हिस्से में नहीं चल रही पढ़ाई
यह जयपुर का महात्मा गांधी स्कूल है, जो इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूल है. यह स्कूल दहमी कलां में स्थित है, जहां राजस्थान सरकार अत्याधुनिक निजी विश्वविद्यालय बना रही है. आजतक के पास बच्चों का फोन आया था कि स्कूल के कमरे कभी भी गिर सकते हैं. स्कूल के मास्टर साहब ने स्कूल के करीब आधे हिस्से को घेर दिया है और बच्चों की पढ़ाई बरामदे में कराई जा रही है.
जब टीम स्कूल पहुंची तो प्रिंसिपल हेमेंद्र जी ने राजस्थान सरकार के नए आदेश का हवाला देते हुए कवरेज रोकने की काफी कोशिश की. हालांकि, बच्चों और शिक्षकों की निजता का ध्यान रखते हुए केवल स्कूल के हालात दिखाने की कोशिश की गई.
आधा स्कूल गिरने की स्थिति में, बरामदे में पढ़ रहे बच्चे
जयपुर जैसे शहर में अगर किसी सरकारी स्कूल की हालत ऐसी है तो दूर-दराज के इलाकों में हालात कैसे होंगे, यह सवाल भी खड़ा होता है. स्कूल का करीब आधा हिस्सा गिरने की स्थिति में है, जबकि बाकी हिस्से में बच्चों की क्लास चल रही है.
प्रिंसिपल ने सरकार के नए आदेश का हवाला देकर कवरेज से मना किया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार अपनी कमियां छुपाना चाह रही है या फिर अवैध घुसपैठ और शिक्षक-छात्रों की निजता भंग होने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है?
20 हजार स्कूल जर्जर, मरम्मत के लिए 12,500 करोड़ का बजट
राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार के दौरान भी एक भी स्कूल नहीं बना. लिहाजा राज्य के करीब 64 हजार स्कूलों में से 20 हजार स्कूल जर्जर हालत में हैं. पहली बार भजनलाल सरकार ने इन स्कूलों की मरम्मत के लिए साढ़े 12 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया है. हालांकि, स्कूलों की मरम्मत और उन्हें तैयार होने में करीब एक साल का समय लगने की बात कही गई है.
अब सवाल यही है कि स्कूलों में वीडियो और फोटोग्राफी पर रोक लगाने से क्या इन जर्जर इमारतों की समस्या दूर हो पाएगी? या फिर असली जरूरत उन स्कूलों की मरम्मत और बच्चों के लिए सुरक्षित क्लासरूम तैयार करने की है.
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