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5 फीसदी से 50 फीसदी तक... PK ने 30 दिन में कैसे ढहा दिया 30 साल का अजेय किला, समझिए

बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बीजेपी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 19 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. इस सीट पर तीन दशकों से बीजेपी का कब्जा था. बीजेपी इस सीट पर अपनी जीत मान रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने पूरा माहौल बदल दिया. चलिए आपको बताते हैं कि प्रशांत किशोर ने 30 दिन में 30 साल का अजेय किला कैसे ढहा दिया?

Prashant Kishor
शशिकांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:31 PM IST

बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दमदार जीत दर्ज की है. पीके ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 19 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. इस जीत का बड़ा संदेश इसलिए भी है, क्योंकि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन ने 63.25 फीसदी वोट हासिल करके बड़ी जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार जन सुराज पार्टी की लहर में बीजेपी हवा हो गई. विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी को 5 फीसदी से भी कम वोट मिले थे. लेकिन 8 महीने में ऐसा क्या बदल गया कि 5 फीसदी से भी कम वोट हासिल करने वाली पार्टी के उम्मीदवार ने 50 फीसदी के करीब वोट हासिल किया और जीत दर्ज की.

5 फीसदी से 50 फीसदी तक का सफर-
बिहार में विधानसभा चुनाव नवंबर 2025 में हुए थे. उस समय प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने पूरे सूबे में उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन 238 में से 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. बांकीपुर सीट पर भी पीके की पार्टी को 7717 वोट यानी 4.97 फीसदी वोट मिले थे. जबकि बीजेपी के नितिन नवीन ने 63.25 फीसदी वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी. लेकिन 8 महीने बाद हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर खुद इस सीट से उम्मीदवार थे और 49.23 फीसदी वोट हासिल करके जीत दर्ज की है. इस बार बीजेपी उम्मीदवार को 43.4 फीसदी वोट मिले हैं.

PK ने 30 दिन में जीत लिया 30 साल का अभेद किला-
बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी का तीन दशकों से कब्जा  था. बीजेपी का ये अभेद किला माना जाता था. लेकिन प्रशांत किशोर ने एक महीने में माहौल बदल दिया और बीजेपी को अजेय किले को ध्वस्त कर दिया. प्रशांत किशोर को उपचुनाव में 64117 वोट मिले. जबकि बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमाह को 44794 वोट मिले हैं. आपको बता दें कि 8 महीने पहले विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार ने 63 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे और 52000 वोटों से जीत दर्ज की थी. लेकिन इतने कम समय में माहौल कैसे बदल गया? चलिए समझते हैं.

बीजेपी का उम्मीदवार बदलना-
बांकीपुर उपचुनाव ने पहले अभिषेक सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया था. लेकिन अचानक बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया. अभिषेक कुमार ने अपना नॉमिनेशन वापस ले लिया. पार्टी ने उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा. इस दौरान बीजेपी के एक सीनियर लीडर का बयान वायरल हुआ कि इस सीट से बीजेपी का कोई भी जीत जाएगा. प्रशांत किशोर ने इसे मुद्दे बना लिया और जनता में मैसेज दिया कि बीजेपी अहंकारी पार्टी हो गई है. वोटर्स को भी लगा कि बीजेपी टेकेन फॉर ग्रांटेड ले रही है.

इसके साथ ही ये भी माना जा रहा था कि बीजेपी के कई सीनियर लीडर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उनको मौका नहीं मिला. इस वजह से उन्होंने उतनी मेहनत नहीं की, जितनी जरूरत थी.

पीके का खुद मैदान में उतरना-
एक तरफ बीजेपी ने एक युवा और नए उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जिसकी लोकप्रियता उतनी नहीं थी, जितनी प्रशांत किशोर की थी. प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरे और जनता को मैसेज दिया कि वो इस चुनाव में गंभीरता से ले रहे हैं. पीके का चुनाव लड़ना वोटर्स के बीच बड़ा आकर्षण रहा. बीजेपी के तमाम दिग्गज लीडर प्रचार में उतरे, लेकिन पीके जैसा आकर्षण बीजेपी उम्मीदवार में वोटर्स को नहीं दिखाई दिया.

30 साल बनाम मौका-
बीजेपी ये मान कर चल रही थी कि पिछले 30 सालों से जिस सीट पर वो अजेय है, उसपर एक नए उम्मीदवार का टिकना नामुमकिन है. लेकिन प्रशांत किशोर एक मौका मांग कर रहे थे और बीजेपी को सबक सिखाने की बात कह रहे थे. पीके ने नए विकल्प का मुद्दा दिया. इसकी वजह से पीके के समर्थन में बीजेपी और आरजेडी के वोटर्स भी खींचे चले आए.

स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का असर-
जिस समय बांकीपुर उपचुनाव को लेकर प्रचार-प्रसार जोरशोर से चल रहा था, उस समय राजधानी दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है. इसका असर बिहार में भी दिखाई दिया. बिहार में भी छात्रों ने मोर्चा संभाला. बांकीपुर के युवा वोटर्स पर इस प्रोटेस्ट का असर हुआ. युवा वोटर्स प्रशांत किशोर की तरफ खिंचे चले गए. 

सीएम सम्राट चौधरी पर पीके का निशाना-
पूरे चुनाव प्रचार में प्रशांत किशोर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लिया. वो लगातार जनता को ये बताने की कोशिश करते रहे कि बांकीपुर का इलाका पढ़े-लिखे लोगों का है. उन्होंने सीएम सम्राट चौधरी की कार्यशैली को निशाने पर लिया. प्रशांत ने सीएम चौधरी को करप्शन और क्रिमिनल तक कहा.

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