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3 बार टाइपिंग टेस्ट में हुआ फेल तो कनिष्ठ सहायक को DM ने बना दिया चपरासी

यूपी के बरेली में डीएम अविनाश सिंह ने कनिष्ठ सहायक को चपरासी के पद पर डिमोशन कर दिया. रेहान खान नाम का ये कनिष्ठ लिपिक 3 बार हिंदी टंकण परीक्षा पास नहीं कर पाए. इसके अलावा गबन के आरोपी एक दूरसे कर्मचारी को भी बर्खास्त किया गया है.

Bareilly News
कृष्ण गोपाल राज
  • बरेली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

उत्तर प्रदेश के बरेली में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एक टाइपिस्ट क्लर्क को पल भर में ही चपरासी बना दिया. बताया जा रहा है कि वह दो बार परीक्षा देने के बाद भी टेस्ट को पास नहीं कर पाया. टाइपिंग नहीं सीख पाया. इसके बाद जिलाधिकारी ने चपरासी बना दिया. यह खबर कलेक्ट के बाहर पहुंची तो चर्चा का विषय बन गई, क्योंकि ऐसा पहली बार था कि जिलाधिकारी ने दो बार मौका देने के बावजूद एक टाइपिस्ट को चपरासी के पद पर बैठा दिया. 

बताया जा रहा है कि मृतक आश्रित कोटे से कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्त रेहान खान लगातार तीन बार हिंदी टंकण परीक्षा पास नहीं कर सके. तीसरे और अंतिम अवसर में भी अनुत्तीर्ण होने के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने उन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया है. रेहान खान तहसील मीरगंज में कार्यरत हैं.

आश्रित से 2021 में मिली थी की नौकरी-
बताया जा रहा है कि रेहान खान की नियुक्ति मृतक आश्रित के रूप में पांच जुलाई 2021 को कनिष्ठ लिपिक के पद पर हुई थी. नियमानुसार उन्हें हिंदी टंकण परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी. पहली परीक्षा 25 सितंबर 2023 को हुई, जिसमें वह अनुत्तीर्ण रहे. इसके बाद उन्हें दूसरा अवसर दिया गया, लेकिन 21 जून 2024 को हुई परीक्षा में भी वह सफल नहीं हो सके. मामले में जानकारी देते हुए जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि रेहान खान को हिंदी टंकण परीक्षा पास करने के लिए तीसरा और अंतिम अवसर दिया गया. आठ सितंबर 2026 को हुई परीक्षा में भी वह निर्धारित मानक हासिल नहीं कर सके. इसके बाद शासनादेश के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई. जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने 16 सितंबर को आदेश जारी कर रेहान खान को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्त कर दिया.

बाकी कर्मचारी को मिला मौका-
इस कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी कार्यालय में तनाव तमाम कर्मचारियों में भी इस बात को लेकर चर्चा हो रही है. प्रशासन कार्रवाई का डर बना हुआ है बनाया जा रहा है, प्रशासन ने टंकण परीक्षा में अनुत्तीर्ण अन्य मृतक आश्रित कर्मचारियों को भी अगला अवसर दिया है. राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना को हिंदी टंकण परीक्षा के लिए तीसरा एवं अंतिम मौका दिया गया है. वहीं कंचित चौधरी और नेहा जोशी को दूसरा अवसर मिलेगा. इन कर्मचारियों को टंकण परीक्षा की तैयारी के लिए दो माह का समय दिया गया. हालांकि ऐसा पहली बार है कि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कलेक्ट्रेट बरेली में यह कार्रवाई की है. पूरे बरेली जनपद में इस बात की चर्चा हो रही है कि योग्यता के आधार पर ही व्यक्ति को नियुक्ति मिलनी चाहिए. लापरवाही करने वालों कर्मचारियों पर कार्रवाई को भी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है और प्रशंसा की जा रही है.

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