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Jhiram Ghati Naxal Attack: 13 साल... 101 गवाह... सैकड़ों सुनवाइयां... और अब झीरम घाटी कांड में बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोग मारे गए थे और 30 से अधिक घायल हुए थे.

Major Decision Regarding the Jhiram Ghati Naxal Attack
धर्मेंद्र महापात्र
  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

छत्तीसगढ़ के चर्चित 2013 झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने शनिवार को मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया. इस नक्सली हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. अदालत दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाएगी.

सभी 10 आरोपियों को ठहराया दोषी 
NIA मामलों के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया. बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी के मुताबिक, शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, लेकिन इनमें से एक की बाद में मौत हो गई. दोषी करार दिए गए लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए. दोषियों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मड़कामी देवा, जोगा मड़कामी, बंजामी सन्ना और महादेव नाग शामिल हैं. बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही है. वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि अभी फैसले की कॉपी नहीं मिली है. आदेश की प्रति मिलने के बाद ही अपील के आधार स्पष्ट किए जाएंगे. वहीं दोषी कोसा कवासी के भाई गुड्डू कवासी ने दावा किया कि कोसा और मुक्का मंडावी को गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है. उनका दावा है कि हमले के समय दोनों गांव में शादी की तैयारियों में व्यस्त थे.

क्या है पूरा मामला
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 'परिवर्तन यात्रा' निकाली थी. बस्तर जिले की झीरम घाटी में नेशनल हाईवे से गुजर रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था. हमले में कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों समेत 29 लोग मारे गए थे. 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. मारे गए प्रमुख नेताओं में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी. इस हमले ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया था.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी जांच
तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर इसकी जांच NIA को सौंप दी थी. राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए तत्कालीन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी बनाया था. NIA ने 25 सितंबर 2014 को जगदलपुर की विशेष अदालत में गिरफ्तार नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद 28 सितंबर 2015 को 30 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई. इनमें से दो आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया. 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने जनवरी 2019 में मामले की जांच के लिए SIT गठित की. कांग्रेस का आरोप था कि NIA ने हमले के पीछे की 'बड़ी साजिश' की पूरी जांच नहीं की. 25 मई 2020 को मारे गए कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर दरभा थाने में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों में नई FIR दर्ज की गई. NIA ने इस जांच को भी अपने हाथ में लेने की मांग की, लेकिन विशेष अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. शीर्ष अदालत ने भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

 

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