उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के कुंभी में बन रहे बायोपॉलीमर प्लांट के लिए बेल्जियम से लाई जा रही एक विशाल मशीन इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. समुद्र के रास्ते यूरोप से भारत पहुंची यह मशीन अब सड़क के रास्ते अपने अंतिम ठिकाने लखीमपुर की ओर बढ़ रही है. वाराणसी पहुंच चुकी इस मशीन को 260 पहियों वाले महाबली ट्रक पर लादकर ले जाया जा रहा है. इसे देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ भी जुट रही है.
कुंभी में बलरामपुर शुगर मिल के परिसर में बायोपॉलीमर प्लांट स्थापित किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, यह देश का पहला और सबसे बड़ा बायोपॉलीमर प्लांट बताया जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा. इसी प्लांट के लिए सायक्लाजेसन रिएक्टर नाम की विशाल मशीन बेल्जियम से भारत लाई गई है. मशीन पहले समुद्री रास्ते से बेल्जियम से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची. इसके बाद इसे सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया. फिलहाल मशीन वाराणसी पहुंच चुकी है.
गाजीपुर से बलरामपुर होते हुए पहुंचेगी लखीमपुर
वाराणसी के राजातालाब रिंग रोड से होकर यह महाबली ट्रक आगे बढ़ेगा. इसके बाद गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती और बलरामपुर होते हुए मशीन को लखीमपुर खीरी के कुंभी ले जाया जाएगा. विशेषज्ञों की टीम ने पहले ही पूरे रास्ते का सर्वे कर लिया है और रास्ते में आने वाली संभावित दिक्कतों को चिन्हित किया गया है.
62 से ज्यादा लोगों की टीम, 3 इंजन भी साथ
इस विशाल मशीन को लखीमपुर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जे.एम. बक्शी हैवी लॉजिस्टिक्स कंपनी संभाल रही है. पारादीप से निकलने के बाद 62 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम इस पूरे ऑपरेशन में लगी हुई है. ट्रक को खींचने के लिए तीन अतिरिक्त इंजन भी साथ चल रहे हैं. सामान्य और समतल रास्ते पर एक इंजन काम करता है, जबकि चढ़ाई वाले हिस्सों में अतिरिक्त इंजनों की मदद ली जाती है.
पहले 308 पहिए थे, अब 260 पहियों पर सफर
कंपनी के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर अनेक भारती के मुताबिक, बेल्जियम से लखीमपुर तक मशीन पहुंचाने में अब तक करीब 6 महीने लग चुके हैं. इसमें कागजी कार्रवाई और जरूरी परमिशन का समय भी शामिल है. पारादीप से उत्तर प्रदेश पहुंचने में करीब 4 महीने लगे.
अनेक भारती ने बताया कि ओडिशा से रवाना होने के समय ट्रक में 308 पहिए थे. रास्ते की जरूरत और सुविधा के हिसाब से ट्रेलर के कुछ हिस्से हटाए गए और अब मशीन को 260 पहियों वाले ट्रक पर ले जाया जा रहा है. टीम के कई कर्मचारियों के लिए पिछले कई महीनों से यही ट्रक अस्थायी घर बना हुआ है. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मशीन अगले 2 से 3 सप्ताह में लखीमपुर के कुंभी पहुंच सकती है.
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