Bengal Assembly Elections 2026: 3 से 77... अबकी बार 160 से कम BJP को मंजूर नहीं, आखिर कैसे TMC के किले में सेंध लगाएगी भाजपा?

Bengal Assembly Elections 2026 Mamata Banerjee Vs BJP: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने की संभावना है. भाजपा ने इस बार 160 सीटों पर विजय पाने का लक्ष्य रखा है. पिछले चुनाव में बीजेपी को 77 सीटें और उससे पहले हुए चुनाव में 3 सीटों पर जीत मिली थी. पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा व ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में जोरदार टक्कर है. अब देखना है कि कैसे बीजेपी ममता बनर्जी के किले में सेंध लगाती है. बीजेपी का कहना है, इसके लिए उसने रणनीति तैयार कर ली है. 

Bengal Assembly Elections 2026 Mamata Banerjee Vs BJP
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

Mamata Banerjee Vs BJP: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर है. 294 सीटों पर चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है. इस चुनाव को भारतीय जनता पार्टी (BJP) किसी भी हाल में जीतना चाह रही है. भाजपा ने इस बार 160 सीटों पर विजय पाने का लक्ष्य रखा है.

विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी को 77 सीटों पर और 2016 में 3 सीटों पर जीत मिली थी. इस बार बीजेपी सिर्फ बहुमत का आंकड़ा 148 को पार नहीं करना चाह रही है बल्कि वह प्रचंड बहुमत में सरकार बनाना चाह रही है. पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा व ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जोरदार टक्कर है. अब देखना है कि कैसे बीजेपी ममता बनर्जी के किले में सेंध लगाती है? बीजेपी का कहना है, इसके लिए उसने रणनीति तैयार कर ली है. 

...तो पश्चिम बंगाल की सत्ता बीजेपी का हाथ में होगी 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में टीएमसी ने जहां 211 सीटों पर जीत दर्ज की थी, वहीं बीजेपी को 77 सीटों पर विजय मिली थी. वोट प्रतिशत की बात करें तो तृणमूल कांग्रेस को 44.91% और भारतीय जनता पार्टी को 38.15% वोट मिले थे. इस तरह दोनों पार्टियों के बीच लगभग 6.5 फीसदी वोट का अंतर रहा था. इसी वोट मार्जिन की वजह से ममता बनर्जी को दो तिहाई बहुमत मिला था.

इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी इसी वोट मार्जिन को कम करना चाह रही है. भारतीय जनता पार्टी ने 160 ऐसी सीटें चिह्नित की हैं, जहां उसे जीत मिलने की प्रबल संभावना दिख रही है. बीजेपी का मानना है कि यदि 5 से 7 फीसदी वोट का स्विंग हो जाए तो पश्चिम बंगाल की सत्ता उसके हाथ में होगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 6 से 7 फीसदी का वोट स्विंग आसान नहीं होता. आम तौर पर सत्ता बदलाव की स्थिति में 2 से 3 फीसद वोटों का अंतर आता है. उधर, भाजपा के रणनीतिकारों के मुताबिक जब बदलाव की स्थिति बनती है तब पुराने आंकड़े ज्यादा मायने नहीं रखते हैं.  

भाजपा ने जीत के लिए बनाई यह रणनीति 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जीत के लिए भाजपा ने विशेष रणनीति बनाई है. बीजेपी ने सीटों को ए, बी और सी श्रेणी में बांट कर 160 सीटों पर जीत दर्ज करने का लक्ष्‍य रखा है. बीजेपी ने ए कैटेगरी में पिछली बार जीती गईं 77 सीटों को रखा है. भाजपा इन सीटों पर फिर जीतने के लिए मजबूत पकड़ बनाए रखने का काम करेगी.

बीजेपी में बी श्रेणी में ऐसी 50 सीटों को चिह्नित किया है, जहां उसको लगता है कि वह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को सीधी टक्‍कर दे सकती है और बड़ा उलटफेर कर सकती है. बीजेपी ने सी श्रेणी में 50 ऐसी सीटों को रखा है, जहां उसे लगता है कि वह यहां रणनीतिक लड़ाई लड़ेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी इन सीटों की पहचान कर चुकी है और चुनाव प्रचार में यहीं पर सबसे अधिक फोकस करेगी. बीजेपी का मानना है कि इस बार बंगाल में चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन के नहीं बल्कि इस राज्य में राजनीतिक-संस्कृति बदलने को लेकर भी चुनाव होगा. बीजेपी का इस बार चुनाव में मुख्य फोकस वंशवाद, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और रोजगार के मुद्दों पर रहेगा. उधर, टीएमसी का कहना है कि बंगाल के लोग विकास और सामाजिक योजनाओं के साथ है. 2026 में भी यहां के लोग दीदी के नेतृत्व पर भरोसा करेंगे. 

बीजेपी निकालेगी परिवर्तन रथ यात्रा
आपको मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने काफी पहले से चुनावी अभियान में जुटी हुई है. बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव कैंपेन के तहत परिवर्तन रथ यात्रा 1 मार्च से निकालने का फैसला लिया है. इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे. यात्रा का समापन कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में होगा और पीएम मोदी यहां एक बड़ी जससभा को संबोधित करेंगे. बीजेपी ने इस रथ यात्रा का मार्ग ऐसा बनाया है, जिसमें उसके प्रभाव वाली अधिकतर सीटों को कवर किया जा सके. बीजेपी अपनी इस रथ यात्रा से बंगाल की जनता में यह भावना पैदा करना चाह रही है कि ममता बनर्जी इस बार चुनाव हार रही हैं, ताकि बदलाव चाहने वाले लोग बिना डरे वोट दे सकें. यदि बदलाव की इच्‍छा वाले लोग बीजेपी के पाले में गए तो भाजपा की जीत पक्की है. 

नेताओं की दी गई है बड़ी जिम्मेदारी 
भाजपा जिन सीटों को जीत सकती है, वहां पर पार्टी के नेता सबसे अधिक चुनाव प्रचार करेंगे. बीजेपी ने चुनाव प्रबंधन में माहिर नेताओं को विशेष जिम्मेदारी दी है. राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को संगठन में गुटबाजी खत्म करने का काम दिया गया है. भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब जैसे नेताओं को उम्मीदवार चयन की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है.

इतना ही नहीं दूसरे राज्यों से आए नेताओं को प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में मंडल और जिला स्तर पर तैनात किया गया है. इनको कम अंतर से हारी सीटों पर खास रणनीति बनाने, आंतरिक मतभेदों को सुलझाना और बूथ स्तर पर मतदाता संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई. भारतीय जनता पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में सीधे तौर पर व्यक्तिगत हमलों से बचने की रणनीति पर भी काम कर रही है. बीजेपी को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची साफ होने से फायदा मिलने की उम्मीद है. बीजेपी के पास बड़ी समस्या है कि उसके पास प्रभावशाली बंगाली नेतृत्व नहीं है. उधर, ममता बनर्जी खुद को बंगाली अस्मिता के साथ जोड़कर जनता का समर्थन हासिल करती रही हैं. 


 

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