Advertisement

Bihar Flood Viral Video: जान हथेली पर रखकर पढ़ाई का जज्बा! लोहे के ड्रम की 'जुगाड़ नाव' चलाकर नदी पार कर रहे मासूम, देखें हैरान करने वाला मंजर

बाढ़ के तांडव के बीच जहां एक तरफ जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं दूसरी तरफ स्कूली बच्चों के सामने शिक्षा हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की मजबूरी खड़ी हो गई है.

बच्चों का स्कूल जाने वाला संघर्ष
gnttv.com
  • बाढ़,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST

बाढ़ के कारण जहां लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित है, वहीं स्कूली बच्चों के सामने भी स्कूल पहुंचने की मुश्किल खड़ी हो गई है. बाढ़ के टाल इलाके में मुहाने नदी में पानी भरने के बाद कुछ बच्चे जुगाड़ की नाव के सहारे नदी पार कर स्कूल जा रहे हैं. बच्चों का यह हौसला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

पीपा पुल के कैप्सूल को बनाया नाव
बाढ़ के एकडंगा पंचायत की छोटी सी बस्ती आजाद नगर के बताए जा रहे ये बच्चे मुहाने नदी के उस पार स्थित प्राथमिक विद्यालय मोगलचक में नामांकित हैं. गंगा नदी में आई बाढ़ का पानी मुहाने नदी में भी भर गया है, जिसके चलते बच्चों के लिए स्कूल जाना मुश्किल हो गया है. बताया जाता है कि मुहाने नदी में पीपा पुल में इस्तेमाल होने वाला लोहे का कैप्सूल काफी समय से पड़ा हुआ है. गांववालों ने इसे रस्से से बांधकर नदी के इस पार से उस पार जाने का जुगाड़ बना लिया है.

खुद ही चला रहे जुगाड़ की नाव
टाल इलाके के मोगलचक गांव में स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने के लिए महादलित बस्ती आजाद नगर के बच्चों ने इसी जुगाड़ की नाव को अपना सहारा बना लिया है. दिलचस्प बात यह है कि बच्चे इस नाव की सवारी खुद ही कर रहे हैं. इस दौरान उनके साथ कोई वयस्क नजर नहीं आता. ऐसे में बाढ़ के पानी के बीच इस तरह नदी पार करना बच्चों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.

पढ़ाई के लिए जज्बा काबिले तारीफ
मुश्किल हालात के बावजूद बच्चे समय पर स्कूल आने-जाने की कोशिश कर रहे हैं. पढ़ाई के प्रति उनका जज्बा जरूर काबिले तारीफ है, लेकिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के तरीके को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता.

शिक्षक ने अभिभावकों को दी सलाह
स्कूल के प्रभारी शिक्षक आदर्श अनिकेत का कहना है कि बच्चों के आने-जाने में खतरा बना रहता है. उनके द्वारा अभिभावकों से बच्चों के साथ स्कूल पहुंचने के लिए कहा जा चुका है. हालांकि, शिक्षक के मुताबिक अभिभावक मजदूरी करने के लिए निकल जाते हैं. इसी वजह से बच्चों को खुद ही स्कूल आना-जाना पड़ता है.

दो किलोमीटर का शॉर्टकट पड़ रहा भारी
इस मामले में बाढ़ के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार ने फोन पर बताया कि बच्चों के गांव से स्कूल तक जाने के लिए सड़क मार्ग मौजूद है. लेकिन इसकी दूरी करीब दो किलोमीटर होने के कारण बच्चे और अभिभावक शॉर्टकट रास्ता अपना रहे हैं. उन्होंने बताया कि अभिभावकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को सुरक्षित रास्ते से ही स्कूल भेजें.
(रिपोर्ट- धर्मेंद्र कुमार)

ये भी पढ़ें

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement