यूपी में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जानता पार्टी (BJP) ने संगठन और सरकार के स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी पकड़ और मजबूत इमेज को भाजपा अपनी बड़ी ताकत मान रही है. उधर, विधायकों के स्तर पर असमंजस और समन्वय की स्थिति को लेकर मंथन जारी है. कई विधायकों की स्थिति और उनके प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है. फोकस इस बात पर है कि सरकार, संगठन और विधायकों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए. विधायकों के फीडबैक और उनकी जमीनी स्थिति को भी चुनावी रणनीति में शामिल किया जा रहा है.
मौजूदा विधायकों और संभावित प्रत्याशियों को लेकर ली जा रही राय
उत्तर प्रदेश में अगले पांच महीनों में विधानसभा चुनाव का ऐलान होने की संभावना के बीच भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी तेज कर दी है. 2027 चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन भाजपा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और दिल्ली में इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने यूपी के सांसदों से वन-ऑन-वन बैठकें शुरू की हैं. चुनाव से जुड़े तथ्यात्मक बातचीत हो रही है. इन बैठकों में सांसदों से अपने लोकसभा क्षेत्र की जमीनी स्थिति, स्थानीय मुद्दों, संगठन की मजबूती और जनता के रुख पर फीडबैक लिया जा रहा है. सांसदों से मौजूदा विधायकों और संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी राय ली जा रही है. नितिन नवीन अब तक 25 से ज्यादा भाजपा सांसदों से मुलाकात कर चुके हैं.
सीएम योगी ने भाजपा अध्यक्ष से की थी मुलाकात
भारतीय जनता पार्टी ने अलग से सर्वे भी शुरू कराया है, जिसमें संगठनात्मक मजबूती, संभावित उम्मीदवारों और चुनाव को प्रभावित करने वाले स्थानीय मुद्दों का आकलन किया जा रहा है. भाजपा का लक्ष्य चुनाव से काफी पहले बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और उम्मीदवार चयन के साथ चुनावी रणनीति तैयार करना है. पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से दिल्ली में मुलाकात की थी.
सत्ता में वापसी का बनाया था रिकॉर्ड
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 41.29 प्रतिशत रहा था. 2022 में भाजपा ने 37 वर्षों में पहली बार यूपी में लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर सत्ता में वापसी का रिकॉर्ड बनाया था. अब भाजपा की नजर 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने पर है.
भाजपा के लिए राहत की बात
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2027 में जीत 2029 के लोकसभा चुनाव की राह को भी आसान बनाएगी. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर भाजपा को यूपी में बड़ा राजनीतिक झटका दिया था. 2022 में 111 विधानसभा सीटें जीतने वाली सपा ने 2024 में लोकसभा चुनाव में आधी से ज्यादा सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की. 2027 में सपा और कांग्रेस के एक साथ चुनाव लड़ने की संभावना है, जबकि मायावती की बसपा अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है. भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि इस बार ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा और जयंत चौधरी की रालोद एनडीए के साथ हैं. संजय निषाद की निषाद पार्टी और अनुप्रिया पटेल की अपना दल भी भाजपा के साथ गठबंधन में हैं. ऐसे में 2027 में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का मुख्य मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन से होने की संभावना है. भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन, संगठन की मजबूती और सहयोगी दलों के सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति के सबसे अहम हिस्से होंगे.