BRICS Summit 2026 Dinner Menu Special Dishes: भारत की मेजबानी में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) की शुरुआत 12 सितंबर 2026 से हो चुकी है. आज शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में भारत मंडपम के लेवल 3 पर रात्रिभोज आयोजित होगा. इस 'शाही दावत' में भारत का स्वाद और संस्कार दोनों नजर आएंगे. खाने के व्यंजन में कमल की मिठाई से लेकर कश्मीरी अखरोट, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी से लेकर रागी डोसा और बाजरा उपमा तक शामिल हो सकता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है ब्रिक्स में होने वाला गाला डिनर (BRICS Gala Dinner) और कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत?
क्या है ब्रिक्स गाला डिनर
आपको मालूम हो कि ब्रिक्स गाला डिनर ब्रिक्स की अध्यक्षता करने वाले देश की ओर से आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह है. ब्रिक्स गाला डिनर का आयोजन शिखर सम्मेलन के पहले दिन के बाद शाम में आयोजित किया जाता है. आपको मालूम हो कि ब्रिक्स गाला डिनर का आयोजन एक औपचारिक भोजन से कहीं ज्यादा है. यह ब्रिक्स नेताओं को आधिकारिक बैठकों से इत्तर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अनौपचारिक बातचीत और कूटनीति का मौका देता है. दिन भर की औपचारिक बैठकों के बाद गाला डिनर आरामदायक वातावरण देता है. गाला डिनर में ब्रिक्स नेता अनौपचारिक रूप से बातचीत कर सकते हैं, अपने विचारों का आदान-प्रदान एक-दूसरे से कर सकते हैं और व्यक्तिगत संबंध बना सकते हैं. गाला डिनर के दौरान नेता पर्सनल बातचीत के दौरान संवेदनशील विषयों पर चर्चा कर सकते हैं, जिन्हें औपचारिक सत्र में संबोधित करना मुश्किल होगा. मेजबान देश गाला डिनर में अपने देश का भोजन, कला, संगीत और आतिथ्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नेताओं के सामने अपनी सांस्कृतिक और विश्व दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है.
गाला डिनर की परंपरा कैसे हुई शुरू
गाला डिनर की परंपरा साल 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहले आधिकारिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से शुरू हुई थी. रूस ने मेजबान देश के रूप में अपने यहां आने वाले नेताओं के लिए एक औपचारिक राजकीय भोज का आयोजन किया था. यह प्रथा बाद में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ जुड़ गई. इस तरह से गाला डिनर की परंपरा शुरू हुई. इसके बाद से ब्रिक्स सम्मेलन के हर मेजबान देश गाला डिनर देने लगे.
इस भोज में क्या-क्या होता है शामिल
ब्रिक्स से जुड़े देशों के नेताओं के लिए आयोजित इस भोज में मेनू का चयन स्थानीय पाक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है. इसमें पारंपरिक, क्षेत्रीय या फिर खास तौर से तैयार किए गए व्यंजन शामिल किए जाते हैं. इस भोज के साथ अक्सर संस्कृतिक प्रदर्शन भी होते हैं. लोक संगीत, शास्त्रीय प्रदर्शन, नृत्य और दूसरी कलात्मक प्रस्तुतियां मेजबान देश को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करने की अनुमति देता है.
भारत ने कर रखी है मेहमानों के लिए खास तैयारी
18वें ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने आए विदेशी मेहमानों के लिए भारत ने खास तैयारी कर रखी है. इस बार भोजन की थाली में भारत का स्वाद और संस्कृति दोनों नजर आने वाले हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय समिट का मेन्यू कैसे तय होता है? आपको मालूम हो कि इतने बड़े सम्मेलन में खाने का मेन्यू तैयार करना भी एक बड़ा प्रोटोकॉल है. पीएमओ, विदेश मंत्रालय और बाकी प्रोटोकॉल टीमें मेहमानों की जरूरतों के हिसाब से पूरी व्यवस्था की निगरानी करती हैं. खाने की थाली में मेहमानों की पसंद-नापसंद, धार्मिक मान्यताएं और वेज या नॉन-वेज पसंद का खास ध्यान रखा जाता है. इस बार की थाली में भारत के अलग-अलग हिस्सों का स्वाद देखने को मिलेगा.
खाने के व्यंजन में कमल की मिठाई से लेकर कश्मीरी अखरोट, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी से लेकर रागी डोसा, पुरानी दिल्ली के मैदा काजू, राजस्थान की खस्ता मिनी कचौरी, महाराष्ट्र की कुरकुरी भाकरवाड़ी, बंगाल की कुचो निमकी, तमिलनाडु के प्रसिद्ध मुरुक्कू और बाजरा उपमा तक शामिल हो सकता है. सूत्रों के अनुसार दिल्ली के चुनिंदा लग्जरी होटलों जैसे ताज महल, द लीला पैलेस और द ललित के शेफों ने मिलकर विदेशी मेहमानों के लिए मेन्यू तैयार किया है. खाने के अंत में मेहमानों को डेसर्ट परोसा जाएगा. पायसम और पारंपरिक भारतीय मिठाइयों के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा दुनिया भर से आए ये दिग्गज नेता भारत की आतिथ्य परंपरा और विविधता को हमेशा के लिए अपने जेहन में संजोकर रखें. आज शाम होने वाले रात्रिभोज की मेजबानी पीएम मोदी करेंगे, जिसमें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, सीजेआई सूर्यकांत समेत देश की खास हस्तियां भी शामिल होंगी. इस भोज में शामिल होने के लिए एनडीए के सभी मुख्यमंत्रियों को भी बुलाया गया है.