रामायण सर्किट के तहत चित्रकूट को नई पहचान देने के लिए विकसित किए जा रहे श्री राम वाटिका ईको पार्क का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. 11.38 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का 50 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है. गणेशबाग क्षेत्र के बगरेही गांव के पास विकसित हो रहा यह ईको पार्क पर्यटकों को प्रकृति, संस्कृति और भगवान राम से जुड़ी विरासत का अनूठा अनुभव प्रदान करेगा. इसके निर्माण से चित्रकूट का आकर्षण बढ़ेगा और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को एक नया पर्यटन स्थल मिलेगा. यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी.
पर्यटकों के लिए विकसित हो रही आधुनिक सुविधाएं
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि श्री राम वाटिका ईको पार्क में पर्यटकों को आकर्षक और यादगार ईको-टूरिज्म अनुभव देने के लिए विभिन्न सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. पार्क की बाउंड्री वॉल का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. वहीं रबर फ्लोरिंग वाले पाथवे, पर्यटक सुविधा केंद्र, चेयर एवं बेंच, कलात्मक इंस्टॉलेशन और बच्चों के खेल उपकरणों सहित कई प्रमुख कार्य तेजी से प्रगति पर हैं. इसके अलावा भगवान राम की वन गमन यात्रा को दर्शाने वाले लाल बलुआ पत्थर के म्यूरल्स भी तैयार किए जा रहे हैं, जो उनके वनवास काल की यात्रा को दृश्य रूप में प्रस्तुत करेंगे.
एम्फीथिएटर में जीवंत होगी रामायण की गाथा
परियोजना के तहत कैफेटेरिया और सामूहिक बैठकों के लिए गजेबो स्पेस भी विकसित किया जा रहा है, जिनका लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. इसके साथ ही 200 से 250 लोगों की क्षमता वाला एक ओपन-एयर एम्फीथिएटर भी बनाया जा रहा है. यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भगवान राम के वनवास काल पर आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग शो का आयोजन किया जा सकेगा.
पार्क की प्राकृतिक सुंदरता और मनोरंजक आकर्षण को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर उद्यान विकास का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों को प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा.
चित्रकूट को मिलेगा रामायण पर्यटन का नया केंद्र
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, श्री राम वाटिका ईको पार्क केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं है, बल्कि चित्रकूट की आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक गौरव को एक मंच पर लाने का प्रयास है. यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति की शांत वादियों के बीच भगवान राम से जुड़ी स्मृतियों और चित्रकूट की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव कर सकेंगे.
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