आपने थ्री इडियट्स के रैंचो की कहानी तो सुनी होगी, जिसको मशीनों से प्यार था. इतना प्यार कि कई छोटे-बड़े अविष्कार कर दिए. आज हम आपको 12वीं क्लास में पढ़ने वाले ऐसे ही एक छात्र से मिलवाएंगे, जिसने बड़े काम का रोबोट बनाया है. इस छात्र का बनाया ये शुरूआती मॉडल है, जिसको एक स्कूल में ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. बड़ी बात ये कि आदित्य के पास रोबोट बनाने से जुड़ी कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं है. अपने घर के माहौल से उन्होंने रोबोट बनाना सीखा. अब उनका सपना अपने इस आविष्कार से छोटे-छोटे गांवों के स्कूलों को विज्ञान और AI से जोड़ना है.
सरकारी स्कूल में 12th क्लास में पढ़ने वाले आदित्य ने रोबोट टीचर बनाया है. उन्होंने कंपाउंडर पिता और दोस्तों से पैसे लेकर रोबोट बनाया है. बुलंदशहर के सरकारी कॉलेज की छुट्टी हो चुकी है. बच्चे अपने घर की तरफ़ दौड़ लगा रहे हैं लेकिन इन सब के बीच एक बच्चा एक अविष्कार करने में लगा हुआ है. इसी स्कूल के 12th क्लास में पढ़ने वाले आदित्य ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो बच्चों को आसानी से पढ़ा सकती है.
क्या खासियत है रोबोट की?
सोफिया (रोबोट) मैम की क्लास में बच्चे भी बेहद खुश होकर सवाल पूछते हैं. बड़ी बात ये कि इस रोबोट को तैयार करने वाले आदित्य ने रोबोटिक के कोई भी फॉर्मल एजुकेशन नहीं हुई है न ही कोई कोर्स किया है. आदित्य कहते हैं कि बचपन में उनके चाचा छोटे मोटे रोबोट बनाया करते थे उनको देखकर ही आदित्य ने ये सब कुछ करना सीखा. आदित्य के पिता एक कम्पाउंडर हैं जिनके महीने की सैलरी महज़ 15 हज़ार रुपए है. आदित्य कहते हैं इस रोबोट को तैयार करने में उन्होंने कई दोस्तों से भी मदद ली है.
क्या कहते हैं आदित्य?
आदित्य बताते हैं कि वैसे तो उन्होंने कई रोबोट बनाए हैं लेकिन कई बार उन्होने यह नोटिस किया के किसी दिन स्कूल में अगर कोई टीचर न आ पाए तो बच्चों को उस पीरियड का नुक़सान होता है. आदित्य कहते हैं कि उनका रोबोट इस समस्या का हल है. साथ ही साथ वो ऐसे रोबोट के ज़रिए गांव देहात के उन स्कूल उन बच्चों तक पहुंचना चाहते हैं जिन्हें अभी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता है.
सोफ़िया देश की दूसरी रोबोटिक टीचर हैं आदित्य कहते हैं कि सरकार को हर डिस्ट्रिक्ट में एक ऐसी लैब तैयार करानी चाहिए जहां बच्चे बिना किसी ख़ास के ऐसे प्रयोग कर पाए आदित्य कहते हैं कि वो एक एस्ट्रोनॉट बनना चाहते है.