मायावती के जिस फैसले को अखिलेश यादव की सरकार ने 2012 में पलट दिया था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर उसी फैसले को लागू कर दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के कार्यक्रम में भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास जनपद कर दिया.
दलित प्रतीकों को लेकर सपा की होती रही है आलोचना-
उत्तर प्रदेश में दलित अस्मिता से यह मुद्दा जुड़ा हुआ था. अखिलेश यादव की इस बात के लिए आलोचना होती रही कि उन्होंने दलित प्रतीकों के साथ अन्याय किया था. मायावती ने जिन दलित महापुरुषों के नाम पर जनपदों और मेडिकल कॉलेज का नाम रखा था. उसे अखिलेश यादव के शासनकाल में बदल दिया गया था. इसके बाद से या मुद्दा हमेशा अखिलेश यादव को घेरने के लिए मायावती और भाजपा दोनों उठाती रही हैं, आज दलितों के इस पड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह दाँव भी चल दिया.
फिर संत रविदास के नाम पर होगा भदोही का नाम-
इस कार्यक्रम में हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीति नवीन को भी आना था. लेकिन उनका कार्यक्रम अंत समय में रद्द हो गया. बताया जा रहा है कि बांकीपुर में कल होने वाले उपचुनाव की वोटिंग को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यक्रम रद्द हुआ. लेकिन मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद की भदोही का नाम एक बार फिर संत रविदास के नाम पर रखा जाएगा. इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है. दलित महापुरुषों के नाम पर जनपदों के नाम रखे जाने का मुद्दा बसपा के दिल के बेहद करीब का मुद्दा है और इस एक फैसले से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की दलित पॉलिटिक्स में नया मास्टर स्ट्रोक चल दिया है.
संत रविदास ने छुआछूत के खिलाफ जगाई थी अलख-
650 साल पहले संत रविदास ने छुआछूत के खिलाफ समाज में अलख जगाई थी, 6 शताब्दी पहले का उन्हें सामाजिक न्याय का पुरोधा माना जाता है. अब बीजेपी संत रविदास के इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी पर खूब हमलावर होगी.
संत रविदास के भक्तों की तादाद पूरी दुनिया में है. पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में रविदासियों की बहुत बड़ी तादाद है. यह वोट बैंक कभी कांग्रेस और उसके बाद बहुजन समाज पार्टी के साथ रहा है. लेकिन बीजेपी ने 2027 के चुनाव के मद्दे रविदासियों के बीच अपनी पाठ बनाने में जुटी है. इतना सफल होती है यह 2027 के विधानसभा चुनाव में, पता चलेगा.
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