विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वाले छात्रों के लिए TOEFL और CELPIP जैसी अंतरराष्ट्रीय परीक्षाएं बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इन परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को आमतौर पर काफी मजबूत समझा जाता है, लेकिन गुजरात के आणंद से सामने आया एक मामला इन दावों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. यहां साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें दीवार में छेद कर परीक्षा में नकल कराई जा रही थी.
गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई
मामला आणंद के ग्रिड चौकड़ी के पास स्थित आणंद आर्ट्स कॉलेज का है. इसी परिसर में 'लिंक होरिज़ोन' कंपनी के बैनर तले TOEFL परीक्षा आयोजित की जा रही थी. बताया गया कि कंपनी और कॉलेज के बीच एमओयू के तहत यह परीक्षा केंद्र संचालित हो रहा था. आणंद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर जे.के. डोडिया को सूचना मिली थी कि परीक्षा केंद्र पर छात्रों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह डमी उम्मीदवारों के जरिए परीक्षा पास कराई जा रही है. सूचना के आधार पर पुलिस ने रणनीति बनाकर अचानक छापेमारी की.
दीवार में छेद, HDMI केबल और स्क्रीन शेयरिंग का खेल
जांच के दौरान पुलिस ने जिस तरीके का खुलासा किया, उसने सभी को हैरान कर दिया. कॉलेज की कंप्यूटर टेस्ट लैब और उससे सटे स्पोर्ट्स रूम के बीच एक कॉमन दीवार थी. आरोपियों ने इसी दीवार में एक छिपा हुआ छेद बनाया था. इस छेद के जरिए HDMI स्प्लिटर एडॉप्टर की केबल स्पोर्ट्स रूम तक पहुंचाई गई थी. परीक्षा देने वाला असली छात्र कंप्यूटर लैब में बैठता था, लेकिन उसकी स्क्रीन बगल के कमरे में मौजूद डमी एक्सपर्ट के सिस्टम पर लाइव दिखाई देती थी. इसके बाद स्पोर्ट्स रूम में बैठा व्यक्ति परीक्षा के सवाल हल करता था और पूरी परीक्षा को नियंत्रित करता था. यानी छात्र केवल नाम का परीक्षार्थी था, जबकि परीक्षा कोई और दे रहा था.
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, लाखों के उपकरण जब्त
पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी तरुणकांत राकेशकांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद का रहने वाला है और फिलहाल अहमदाबाद के साउथ बोपल इलाके में रह रहा था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने लगभग 3 लाख 78 हजार रुपये कीमत के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर सिस्टम और स्प्लिटर गैजेट्स भी जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल इस पूरे फर्जीवाड़े में किया जा रहा था. आणंद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(3), 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 319 (फर्जीवाड़ा), धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और आईटी एक्ट 2000 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है.
अहमदाबाद तक पहुंची जांच की कड़ी
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार तरुणकांत शर्मा इस पूरे नेटवर्क का अकेला खिलाड़ी नहीं है. जांच में अहमदाबाद के दो अन्य नाम सामने आए हैं. इनमें हर्षदभाई भोगीलाल रावल (निकोल, अहमदाबाद) और अर्थ सुनीलभाई बुंदेला (अहमदाबाद) शामिल हैं. दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस ने इन आरोपियों की तलाश में गुजरात के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस रैकेट का नेटवर्क गुजरात से आगे बढ़कर दिल्ली-एनसीआर और पंजाब तक फैला हो सकता है.
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
दीवार में छेद कर अंतरराष्ट्रीय परीक्षा में इस तरह की सेंधमारी सामने आने के बाद ऑनलाइन परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा केंद्रों को प्रमाणित करने से पहले उनकी जांच और निगरानी कितनी गंभीरता से की जाती है. फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक इस रैकेट के जरिए कितने उम्मीदवारों को फर्जी तरीके से परीक्षा पास कराई गई और कितने लोगों ने विदेश जाने के लिए इस नेटवर्क का सहारा लिया. मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर बहस तेज हो गई है.
(रिपोर्ट- हिताली एम शाह)
ये भी पढ़ें