दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले की सुनवाई 25 सितंबर को होगी. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार, एमसीडी और दिल्ली विश्वविद्यालय को हॉस्टल्स की कमी पूरी ना करने पर कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि लापरवाह अफसरों और महकमों के लचर और लाचार रवैए की वजह से स्थिति दयनीय ही नहीं नारकीय है.
याचिकाकर्ता के वकील की दलील-
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील रखी कि हर कुछ महीनों के अंतराल पर ऐसी घटनाएं होती हैं ,जहाँ निर्दोष छात्र अपनी जान गंवा देते हैं. कभी आग लगती है, कभी पानी भरता है तो कभी इमारत ढह जाती है. इसमें दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को कुछ करना चाहिए.
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय, एमसीडी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया.
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और एमसीडी की ओर से पेश हो रहे हैं.
कोर्ट की टिप्पणी-
अदालत ने टिप्पणी की कि हमें लगता है कि इन सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों को अधिक गहन और अर्थपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है.
जो इमारतें ढही हैं, उनमें पास ही स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. यह एक आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले अपने छात्रों को पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं प्रदान नहीं करता है, जिसके कारण छात्र पीजी (PGs) में रहने के लिए मजबूर हैं.
सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत-
यह जनहित याचिका सत्य निकेतन इलाके में हुई बेहद दुखद घटना के मद्देनज़र दायर की गई है, जहाँ लड़कों के पीजी हॉस्टल (PG Hostel) के रूप में चलाई जा रही दो इमारतें ढह गईं, जिनमें लगभग 50 छात्र रह रहे थे. इस हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की जान जा चुकी है.
इन इमारतों में रहने वाले कई प्रभावित छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है और कई अन्य छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जो अपनी ज़िंदगी और मदद के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार-
हाईकोर्ट ने बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त संख्या में हॉस्टल न होने पर डीयू को फटकार लगाई और सवाल किए.
पीठ ने एमसीडी से पूछा कि पेइंग गेस्ट यानी पीजी के संचालन को लेकर क्या कोई नियम या विनियम लागू हैं?
हाईकोर्ट ने कहा कि उल्लिखित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि इसने डीयू द्वारा चलाए जा रहे हॉस्टलों के रूप में अपर्याप्त आवास सुविधाओं, छात्रों की सुरक्षा एवं संरक्षा, और ऐसे पीजी हॉस्टलों को नियंत्रित करने के लिए एमसीडी व अन्य अधिकारियों द्वारा किए गए अपर्याप्त उपायों पर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसे हादसों की जिम्मेदारी केवल पीजी हॉस्टल के मालिक पर नहीं होती, जिम्मेदारी एमसीडी प्रशासन की भी बनती है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है कि हर एक निर्माण कार्य नियमों के अनुसार ही हो.
जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करें- कोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि एमसीडी उच्चतम कार्यकारी स्तर पर इस बात की जांच कराए कि जो इमारतें ढही हैं, क्या उनका निर्माण वैध अनुमति से किया गया था.
यदि इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी, तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करें.
दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा दें.
एमसीडी पीजी हॉस्टलों का ऑडिट कर जांच करे कि क्या उनका निर्माण प्रासंगिक अनुमतियों/इमारत उप-नियमों (Building Bylaws) के तहत किया गया है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर ले रहे हैं.
चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट पीजी के रूप में किराए पर दिया जा रहा है? हम सॉलिसिटर जनरल द्वारा एमसीडी, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से दिए गए इस आश्वासन को दर्ज करते हैं कि सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
हम उम्मीद करते हैं कि राहत और बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा ताकि इंसानी जिंदगियां बचाई जा सके.
छात्रों के लिए हॉस्टल सुनिश्चित करने को कहा-
हाईकोर्ट ने केंद्र और डीयू को छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा सुनिश्चित करने को कहा. कोर्ट ने पीजी को नियंत्रित और नियमित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि पीजी मालिक लापरवाही और अंधाधुंध तरीके से पीजी का निर्माण करते हैं. 2 मंजिलों की अनुमति दी जाती है और वे 7 मंजिलें बना लेते हैं. त्रासदी की वजह यह भी हो सकती है. अभी ही 50 युवा छात्र जो अपने जीवन के शुरुआती पड़ाव पर थे, उनमें से केवल कुछ ही लोगों को बचाया जा सका है. 7 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य मलबे के नीचे दबे हुए हैं.
कोर्ट ने कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है. आप अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते.
सॉलिसिटर जनरल ने वीडियो के प्रसारण पर रोक की मांग-
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट मलबे में फँसे हुए और मृत छात्रों के वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश दे. हाईकोर्ट ने कहा कि हम इस पर भी विचार करेंगे.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि आप क्या कर रहे हैं? यह त्रासदी घटित हो चुकी है. भविष्य में इसे रोकने के लिए आप क्या कर रहे हैं? कोर्ट ने कहा कि यदि पीजी (PGs) के लिए कोई नियम या नियमावली नहीं है, तो आपको ही बनानी होगी. जब आप गेस्ट हाउसों को विनियमित कर सकते हैं, तो पीजी को क्यों नहीं? पीजी या गेस्ट हाउस के आकार, बिजली, सुरक्षा आदि को विनियमित किया जाना चाहिए. हर दूसरे साल ऐसा हो रहा है और हम इसे भुगत रहे हैं.
मामले में अगली सुनवाई 2 हफ्ते बाद-
याचिका में असुरक्षित परिसरों के खिलाफ कार्रवाई, महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, और एक निष्पक्ष, तटस्थ, प्रभावी एवं विस्तृत आपराधिक जांच की मांग की गई है.
याचिका में भवन ढहने के कारणों का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक/तकनीकी समिति का गठन करने की मांग की गई है.
याचिका में सत्य निकेतन और दिल्ली के अन्य छात्र-बहुल इलाकों में स्थित पीजी यानी पेइंग गेस्ट सुविधा, सामान्य हॉस्टल और अन्य छात्र आवास सुविधाओं के व्यापक संरचनात्मक और सुरक्षा ऑडिट करने की गुहार लगाई गई है.
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास रविवार 6 सितंबर 2026 को एक 5 मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें लड़कों का पीजी हॉस्टल Hostel Daze चल रहा था.
7 लोगों की मौत और कई घायल-
दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. याचिकाकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता ने मृतकों के परिजनों के लिए 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे, स्वतंत्र जांच और इलाके के सभी पीजी व हॉस्टल की इमारतों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है. इमारत मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
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