आम आदमी पार्टी ने तथाकथित शराब घोटाले में निचली अदालत से पार्टी के नेताओं को दोषमुक्त किए जाने के बावजूद भाजपा नेताओं की तरफ से सजा दिलाने के किए जा रहे दावों पर सवाल खड़ा किया. AAP दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा को कैसे पता है कि आबकारी मामले में क्या फैसला आना है? क्या भाजपा-जज में कोई रिश्ता है? कपिल मिश्रा कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है. ये किस पिक्चर की बात हो रही है? जबकि अभी मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई होनी बाकी है. क्या ये लोग कहना चाह रहे हैं कि जज से मन मुताबिक निर्णय करवा लेंगे?
इनको कैसे पता कि आगे क्या होने वाला है- सौरभ
AAP लीडर ने भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के दावों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने वीरेंद्र सचदेवा का एक वीडियो दिखाकर कहा कि वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक अपराधी हैं और जैसे-जैसे अदालती कार्यवाही आगे बढ़ेगी, इनको सजा निश्चित ही मिलेगी. यह इन्हें पता है. भाजपा सरकार के दूसरे मंत्री कपिल मिश्रा ने सोमवार को ट्वीट किया कि ‘पिक्चर अभी बाकी है’. जिस तरह से दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं कि निश्चित ही सजा मिलेगी और कपिल मिश्रा कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है, तो इन्हें कैसे पता कि आगे क्या होने वाला है?
पिक्चर में क्या बाकी है- सौरभ भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि पिक्चर में क्या बाकी है, यह कपिल मिश्रा को कैसे पता? यह तो अभी हाई कोर्ट की न्यायाधीश को भी नहीं पता होगा. जब वे मामला न्यायाधीश पढ़ेंगी, तब उन्हें पता चलेगा. वीरेंद्र सचदेवा कैसे कह सकते हैं कि निश्चित तौर पर सजा मिलेगी? क्या वे सीधे तौर पर यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें मालूम है कि इस मुकदमे में क्या होगा? इन्हें कैसे मालूम है कि आगे की कहानी क्या है? यह वे कैसे कर सकते हैं? यह मामला तो हाईकोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा जी के पास है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि क्या ये यह कहना चाह रहे हैं कि वे जो फैसला चाहेंगे, वह न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से करवा लेंगे? यह सवाल बहुत बड़े इसलिए हो जाते हैं क्योंकि यह वही कपिल मिश्रा हैं, जिन्होंने दिल्ली दंगों से पहले खुलेआम धमकी देकर दंगों को भड़काने का प्रयास किया था, जिसका वीडियो सबके सामने है. यह फरवरी 2020 की बात है और उसी समय 26 फरवरी 2020 को इसी दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश मुरलीधर ने अपनी अदालत में दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया था.
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