धौलपुर की बदली तस्वीर... कभी बागियों के लिए मशहूर चंबल के बीहड़, अब बने टाइगर और दुर्लभ काले हिरणों का नया ठिकाना

राजस्थान का धौलपुर जिला, जो कभी डकैतों और बीहड़ों के लिए जाना जाता था, अब वन्यजीवों के संरक्षण का केंद्र बन गया है.

Dholpur WILDLIFE
gnttv.com
  • धौलपुर,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

राजस्थान के धौलपुर जिले का नाम सुनते ही आंखों के सामने बागी, बंदूक और बीहड़ की तस्वीर आ जाती थी. चंबल के बीहड़ों का बागी और बंदूक से काफी पुराना नाता रहा है. चंबल का नाम आते ही घोड़ों पर दौड़ते डकैतों की छवि नजर आती थी. समय बदला तो बीहड़ों से घोड़े गायब हो गए, लेकिन अब चंबल का बीहड़ टाइगर, पेंथर, भालू, हिरण, लेपर्ड, सियार, जरख, जंगली बिल्ली, लोमड़ी, भेड़िया, बिज्जू, कवर बिज्जू, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, सैही समेत अन्य वन्यजीवों को रास आ गया है. धौलपुर के जंगलों में लगातार वन्यजीवों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है. साथ ही 6 टाइगर विचरण कर रहे हैं.

समोना बीहड़ में दिखा काले हिरणों का झुंड
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के समोना इलाके के बीहड़ों में पहली बार दुर्लभ और सुंदर दिखने वाले काले हिरणों का झुंड दिखाई दिया है. क्षेत्रीय वन अधिकारी वन्यजीव दीपक मीणा को 30 से अधिक काले हिरण (ब्लैक बक) मिले हैं. कृष्ण मृग के नाम से जाना जाने वाला काला हिरण मुख्यतः भारत, नेपाल और पाकिस्तान में पाया जाता है. इनके सुंदर और आकर्षक सींग 35 से 75 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं. इनके अत्यधिक शिकार के कारण यह लुप्त होने की कगार पर है. घड़ियालों और डॉल्फिन के लिए मशहूर इस अभयारण्य में काले हिरणों की यह मौजूदगी पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक बदलाव और बेहतर संरक्षण प्रयासों का संकेत देती है.

वन्यजीव गणना में मिला अच्छा परिणाम
धौलपुर जिले के डीएफओ एनसीएस डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा से शुरू हुई वन्यजीवों की गणना में इस बार बहुत अच्छा परिणाम मिला है. पिछले वर्ष की तुलना में वन्यजीवों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. जिले में पांच सेंचुरी हैं, जिनमें केशरबाग, वनविहार, रामसागर, चंबल अभयारण्य और धौलपुर सेंचुरी शामिल हैं. इन्हें मिलाकर नवगठित धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व बनाया गया है.

34 स्थानों पर दिखे वन्यजीव
मई महीने में हुई गणना के दौरान धौलपुर जिले की पांचों सेंचुरी में लेपर्ड, सियार, जरख, जंगली बिल्ली, हाइना, लोमड़ी, भेड़िया, भालू, बिज्जू, कवर बिज्जू, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, सैही, टाइगर, पेंथर, हिरण समेत अन्य वन्यजीव 34 स्थानों पर पानी पीते हुए मिले. वन कर्मियों ने मचान और ऊंचे स्थानों पर जाकर यह गणना की. वहीं समोना के बीहड़ में दुर्लभ 30 काले हिरणों का झुंड मिला, जिनमें नर और मादा दोनों शामिल हैं.

टाइगर रिजर्व में बढ़ रही संख्या
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल 10 बाघ हैं, जिनमें से 6 धौलपुर में और 4 करौली में हैं. धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र घोषित हो चुके हैं और संरक्षण योजना की तैयारी चल रही है. इससे यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे.

कैमरों से हो रही निगरानी
रिजर्व क्षेत्र में कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे जानवरों की निगरानी की जा रही है. विलुप्तप्राय जानवर कैराकल और वुल्फ भी कैमरे में कैद हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों की वजह से बहुत समृद्ध है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है.

काला हिरण और अन्य मृगों की खासियत
वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी की बात है कि समोना इलाके में पहली बार काले हिरणों का झुंड दिखाई दिया है. काला हिरण, जिसे कृष्ण मृग भी कहा जाता है, घास भूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रजाति है. वयस्क नर का रंग गहरे भूरे से काले तक होता है और उसके सर्पिल सींग होते हैं, जबकि मादा हल्के पीले-भूरे रंग की होती है और सामान्यतः बिना सींग की होती है. यह एक शाकाहारी और दिवाचर प्रजाति है, जो मुख्यतः घास और कोमल वनस्पतियों पर निर्भर रहती है. यह आमतौर पर समूहों में रहता है, जिनका आकार मौसम और भोजन की उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है. काले हिरण के अलावा चीतल, सांभर और चिंकारा जैसे अन्य मृग भी यहां पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को और समृद्ध बनाते हैं.

(रिपोर्ट- उमेश मिश्रा)

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