दीपावली रोशनी और खुशियों का त्योहार है. इस दिन लोग अपने घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं. लेकिन इन तैयारियों के बीच कुछ जगहों पर एक ऐसी परंपरा भी निभाई जाती है, जिसका रिश्ता भाई-बहन के प्यार और परिवार की खुशहाली से जुड़ा है. धनतेरस के दिन कई घरों में बच्चे मिट्टी का तीन मंजिला छोटा-सा घर बनाते हैं, जिसे घरौंदा कहा जाता है. दीपावली के दिन इसे दीयों से रोशन किया जाता है और फिर इसकी पूजा होती है. इस परंपरा में घर की बहनों की खास भूमिका होती है.
घरौंदे की पूजा में निभाई जाती है खास रस्म
घरौंदे की पूजा के दौरान बहनें मिट्टी की कुल्हिया-चुकिया में लावा, खील और बताशे भरकर घर भराई करती हैं. इसके बाद छोटे से घर को पांच बार टीका लगाया जाता है और पानी से निहोछावर किया जाता है. फिर धूप-बत्ती दिखाकर पूजा की जाती है. इस दौरान घर की महिलाएं लोकगीत भी गाती हैं. इन गीतों में भाई-बहन के रिश्ते और उनके बीच का प्यार साफ झलकता है.
पूजा पूरी होने के बाद बहनें घरौंदे को प्रणाम करती हैं और अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. इसके बाद घरौंदे पर चढ़ाई गई चीजों को प्रसाद के रूप में भाई को खिलाया जाता है. बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं. इस परंपरा से जुड़ी एक लोकमान्यता यह भी है कि इस दिन भाई को बहनों के हाथ से प्रसाद खाए बिना कुछ नहीं खाना चाहिए और बदले में बहनों को पैसे या उपहार देना चाहिए. पूजा में चढ़ाई गई चीजें बहनें खुद नहीं खाती हैं, बल्कि भाई को खिलाती हैं. माना जाता है कि बहन के हाथ से प्रसाद खाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन का वास बना रहता है. इस रस्म के जरिए बहनें अपने भाई की खुशहाली की कामना करती हैं, वहीं भाई भी उन्हें उपहार देकर अपना स्नेह जताते हैं.
भगवान राम के अयोध्या लौटने से भी जुड़ी है एक मान्यता
घरौंदा बनाने की परंपरा को भगवान राम के अयोध्या लौटने से भी जोड़कर देखा जाता है. प्रचलित मान्यता के अनुसार, 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद जब प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे थे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. उनके लौटने से अयोध्या में फिर से खुशियां लौटीं और लोगों ने अपने घरों को सजाया. इसी प्रसंग से घरौंदा बनाने की परंपरा को भी जोड़ा जाता है. मिट्टी का छोटा घर बनाना खुशहाल जीवन और घर में समृद्धि आने की कामना का प्रतीक माना जाता है.
घरौंदा सिर्फ मिट्टी से बना एक छोटा-सा घर नहीं है. इसके साथ परिवार के सुख, समृद्धि और आपसी रिश्तों की भावनाएं जुड़ी हैं. खास बात यह है कि इस परंपरा में बच्चों की भागीदारी होती है और भाई-बहन एक-दूसरे के लिए मंगलकामना करते हैं. समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन घरौंदे से जुड़ी यह परंपरा आज भी कई परिवारों में उसी अपनापन और उत्साह के साथ निभाई जाती है.
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