भाई और मां को खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, गाजीपुर में ड्राइवर की बेटी बनी IAS

प्रियंका चौधरी के पिता नीरा राम तहसील जखनियां में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, वे एसडीएम के ड्राइवर के रूप में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में जखनियां तहसील के रिकॉर्ड रूम में सहायक नजारत पद पर तैनात हैं.

Priyanka Chaudhary
gnttv.com
  • गाजीपुर,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:42 AM IST
  • बीच प्रियंका चौधरी ने हासिल की ऑल इंडिया 79वीं रैंक
  • भाई और मां को खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जखनियां ब्लॉक के गौरा खास गांव की रहने वाली प्रियंका चौधरी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया 79वीं रैंक प्राप्त की है. साधारण परिवार से आने वाली प्रियंका की इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी का माहौल है. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया.

ड्राइवर की बेटी ने रचा इतिहास
प्रियंका चौधरी के पिता नीरा राम जखनियां तहसील में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं. वे पहले एसडीएम के ड्राइवर के रूप में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में तहसील के रिकॉर्ड रूम में सहायक नजारत के पद पर तैनात हैं. बेटी की सफलता पर भावुक पिता ने कहा कि अगर कभी मौका मिला तो वह गर्व के साथ अपनी बेटी का भी वाहन चलाने के लिए तैयार हैं. प्रियंका की इस उपलब्धि से उनके गांव गौरा खास ही नहीं बल्कि पूरे जखनियां क्षेत्र और गाजीपुर जिले में खुशी का माहौल है.

जखनियां से लेकर बीएचयू तक की पढ़ाई
प्रियंका की शुरुआती शिक्षा जखनियां के श्री महावीर सूर्योदय उत्तर माध्यमिक विद्यालय से हुई. इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई शहीद इंटर कॉलेज, जखनियां गाजीपुर से पूरी की. आगे की पढ़ाई और सिविल सेवा की तैयारी के लिए वह वाराणसी में रहकर कड़ी मेहनत करती रहीं. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी. हाल ही में उन्होंने एसएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की और वर्तमान में प्रयागराज में जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं.

एक साल में परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रियंका के परिवार के लिए पिछले एक वर्ष बेहद कठिन रहा. उनके इकलौते भाई रितेश उर्फ गोल्डी का बीमारी के चलते निधन हो गया. इसके कुछ ही समय बाद तीन महीने पहले उनकी मां शांति देवी का भी आकस्मिक निधन हो गया.

इन दुखद परिस्थितियों के बावजूद प्रियंका ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी जारी रखी. पिता के अनुसार यह सफलता उनके संघर्ष और आत्मविश्वास का परिणाम है.

बड़ी बहन ने संभाली जिम्मेदारी
प्रियंका की बड़ी बहन प्रीति ने बताया कि परिवार में मुश्किल समय के दौरान उन्होंने घर की जिम्मेदारियां संभालीं, ताकि प्रियंका को पढ़ाई के लिए पूरा समय मिल सके. उन्होंने कहा कि उनकी बहन की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है.

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
प्रियंका चौधरी की इस उपलब्धि ने पूरे जखनियां क्षेत्र और गाजीपुर जिले में उत्साह भर दिया है. सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह जिले के लिए गौरव का पल है.

-विनय कुमार सिंह

 

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