दिल्ली में हुई झमाझम बारिश, कहीं राहत तो कहीं इम्तिहान.. क्या इस बार बदली दिल्ली की तस्वीर?

मानसून की यह पहली बारिश दिल्ली सरकार की तैयारियों की एक बड़ी परीक्षा थी. सरकारी तैयारियों के चलते कई पुराने जलभराव वाले हॉटस्पॉट पर स्थिति पहले से बेहतर रही, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी समस्याएं बरकरार हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली लगातार बारिश ही तय करेगी कि दिल्ली इस बार मानसून से कितनी राहत पाती है और कितनी परेशानी.

Waterlogging In Delhi (PTI)
सुशांत मेहरा
  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST

दिल्ली में मानसून की पहली झमाझम बारिश ने राजधानी को दोहरी राहत दी. एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, तो दूसरी ओर बारिश ने हवा को साफ कर प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट दर्ज की. लेकिन दिल्ली में बारिश का मतलब सिर्फ राहत नहीं होता, बल्कि हर साल होने वाला जलभराव, ट्रैफिक जाम और लोगों की परेशानियां भी हैं.

मानसून रहा दिल्ली की परीक्षा

करीब 50 मिमी बारिश होते ही दिल्ली के कई हिस्सों में सड़कें तालाब बन जाती थीं. गाड़ियां पानी में फंस जाती थीं, कई वाहन खराब हो जाते थे और लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहते थे. यही वजह है कि हर मानसून दिल्ली की तैयारियों की असली परीक्षा बन जाता है. हालांकि इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आई. 

दिल्ली सरकारा ने कसी थी कमर

दिल्ली सरकार ने इस बार उन 40 जलभराव वाले हॉटस्पॉट की पहचान की थी, जो पिछले कई वर्षों से हर बारिश में लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते थे. सरकार का दावा है कि इनमें से 39 हॉटस्पॉट पर जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया गया. 

आईटीओ, मिंटो ब्रिज, जखीरा अंडरपास और दिल्ली सचिवालय जैसे इलाके, जो हर बारिश में सुर्खियां बनते थे, वह इस बार पहले जैसी गंभीर स्थिति में नजर नहीं आए. सरकार की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा खुद कंट्रोल रूम पहुंचे और 179 सीसीटीवी कैमरों के जरिए राजधानी के अलग-अलग इलाकों की लाइव मॉनिटरिंग करते रहे.

एक्शन में दिखा कंट्रोल रूम

बारिश के बाद कंट्रोल रूम में लगातार जलभराव की शिकायतें आती रहीं. जहां-जहां से शिकायत मिली, वहां तुरंत रैपिड रिस्पॉन्स टीम को भेजा गया ताकि सड़कों से पानी निकाला जा सके और यातायात सामान्य रखा जा सके. पीडब्ल्यूडी मंत्री ने भी स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में अभी भी जलभराव की समस्या सामने आई है, लेकिन उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में लोगों को कम से कम परेशानी हो.

हालांकि बारिश के साथ दूसरी चुनौतियां भी सामने आईं. राजधानी के कई इलाकों में पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं. रंजीत नगर में एक चलती कार पर पेड़ गिर गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. वहीं ईस्ट ऑफ कैलाश में इस्कॉन मंदिर के पास मुख्य सड़क पर भी तड़के करीब 3 से 3:30 बजे के बीच एक पेड़ गिर गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी देर से मौके पर पहुंचे, जिसके बाद पेड़ हटाने का काम शुरू किया गया.

इसके अलावा महरौली-बदरपुर रोड और संगम विहार के शनि बाजार रोड पर जलभराव देखने को मिला, जिससे लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

 

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