गोरखपुर में पंचर बनाने वाले के नाम पर खड़ी कर दी 100 करोड़ की कंपनी, 28 करोड़ की GST चोरी का नोटिस मिलने पर खुला राज

यूपी के गोरखपुर में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक मामूली पंचर बनाने वाले की मजबूरी का फायदा उठाकर एक जालसाज ने उसके नाम पर फर्जी कंपनी खोलकर सरकार को 100 करोड़ के टर्नओवर पर 28 करोड़ रुपए की CGST चपत लगाई गई है.

Fake Company Case
gnttv.com
  • गोरखपुर,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST
  • CGST का समन मिलते ही उड़ गए होश
  • 28 करोड़ की GST चोरी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पंचर की दुकान चलाने वाले एक युवक के नाम पर कथित तौर पर फर्जी कंपनी बनाकर 100 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया गया. इतना ही नहीं, कंपनी पर 28 करोड़ रुपए की GST चोरी का आरोप भी सामने आया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब केंद्रीय GST विभाग की ओर से युवक को समन भेजा गया.

जांच टीम गांव पहुंची तो देखकर रह गई हैरान
मामला गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग गांव का है. यहां रहने वाले राज प्रजापति अपनी रोजी-रोटी के लिए पंचर की दुकान चलाते हैं. उन्हें CGST विभाग से समन मिला, जिसमें बताया गया कि उनके नाम पर "मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड" नाम की कंपनी संचालित हुई और उसका टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपए रहा. जब वाराणसी से CGST विभाग की टीम जांच के लिए राज के गांव पहुंची तो उनकी आर्थिक स्थिति और पंचर की छोटी सी दुकान देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए. राज ने अधिकारियों को पूरी कहानी बताई, जिसके बाद टीम बिना कोई कार्रवाई किए लौट गई.

100 करोड़ का कारोबार दिखाकर बंद कर दी गई कंपनी
जानकारी के मुताबिक, फरवरी 2026 में वाराणसी CGST विभाग को जांच के दौरान पता चला कि उक्त कंपनी ने करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार किया है. कंपनी पर लगभग 28 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया भी पाया गया. हैरानी की बात यह रही कि भारी कारोबार दिखाने के बाद कंपनी को बंद भी कर दिया गया. इसके बाद मार्च 2026 में जांच की कड़ियां जोड़ते हुए CGST की टीम राज प्रजापति के पते पर पहुंची और मामले की पड़ताल शुरू की.

बहन की शादी के लिए लिया था उधार, वहीं से शुरू हुई ठगी
राज प्रजापति के मुताबिक, वर्ष 2024 में उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी. इसी दौरान गांव के एक युवक ने बैंक से लोन दिलाने और आर्थिक मदद का भरोसा दिया. राज का आरोप है कि इसी बहाने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए गए. आरोपी ने उससे कई जगह हस्ताक्षर भी कराए और दो बार वीडियो रिकॉर्डिंग भी की. उस समय राज को अंदाजा नहीं था कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी फर्जीवाड़े में किया जाएगा.

फर्जी कंपनी बनाकर बैंक खाता भी खुलवाया
पीड़ित का आरोप है कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर "मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड" नाम से कंपनी रजिस्टर कराई गई. इतना ही नहीं, कंपनी के नाम पर यस बैंक में खाता भी खुलवाया गया और बड़े स्तर पर वित्तीय लेन-देन किया गया. राज को इस पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब उसके नाम पर GST विभाग का समन पहुंचा.

समन मिलने के बाद थाने पहुंचा पीड़ित
27 मई 2026 को वाराणसी CGST कार्यालय की ओर से राज प्रजापति को आधिकारिक समन जारी किया गया. उन्हें 29 मई को वाराणसी स्थित कमिश्नर कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था. समन मिलने के बाद घबराए राज ने 30 मई को एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी.

पुलिस ने शुरू की जांच
गोरखपुर की सीओ कैंट आभा सिंह ने बताया कि राज प्रजापति की शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है. शिकायत में गांव के ही अमित गुप्ता पर आरोप लगाया गया है कि उसने लोन दिलाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर लिए थे. प्रारंभिक आरोपों के अनुसार इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बनाई गई और धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया. पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

-गजेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट

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