स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रणेता, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर राजधानी लखनऊ में भव्य सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारी है. आगामी 14 अप्रैल को शहर के अलग-अलग प्रमुख स्थलों पर कला, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने आयोजनों से संबंधित खास तैयारियां की हैं.
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'इस अवसर पर आंबेडकर महासभा, आंबेडकर मेमोरियल और डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन आयोजनों के जरिए गायन, नाट्य मंचन और विशेष प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और मानवाधिकार का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा.
कलाकारों की सुर साधना से सजेगा आयोजन
आंबेडकर महासभा में लखनऊ के राम निवास पासवान और रितेश कुमार अपनी गायन प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे. वहीं आंबेडकर मेमोरियल में गाजीपुर के पोरस राम, लखनऊ के दिनेश कुमार, मऊ के त्रिभुवन भारती, लखीमपुर खीरी के श्यामजीत सिंह और प्रतापगढ़ के पारस नाथ सरोज सहित कई कलाकार अपने सुरों से माहौल को भावपूर्ण बनाएंगे. अर्चना प्रजापति और संजय यादव भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में रंग भरेंगे.
सामाजिक सरोकारों पर नाट्य मंचन
सामाजिक सरोकारों पर आधारित नाट्य मंचन में लखनऊ के विपिन कुमार और उन्नाव के योगेन्द्र पाल अपनी टीम के साथ प्रभावशाली प्रस्तुतियां देंगे. वहीं, मुंबई से पहुंचे विशिष्ट कलाकार सचिन वाल्मीकि अपनी खास प्रस्तुति से आयोजन में चार चांद लगाएंगे, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होगा.
प्रस्तुति में न्याय, समानता और मानवाधिकार की झलक
डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय में बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस अवसर पर मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध कलाकार संजो बघेल अपनी प्रस्तुति देंगी. कार्यक्रम का मकसद सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकार जैसे अहम मुद्दों को सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचाना है, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव की सोच को और मजबूती मिल सके.
आयोजनों के जरिए जन-जन तक पहुंचेगा संदेश
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि '14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर भारतीय इतिहास के सबसे विद्वान और दूरदर्शी नेताओं में से एक थे. उनके पास अनेक उच्च डिग्रियां थीं. वे कई भाषाओं एवं विषयों के गहरे जानकार थे. स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में उन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं. यही संदेश इन सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाएगा.'
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल संविधान के शिल्पकार ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के सामाजिक न्याय के आधार स्तंभ हैं. उनके द्वारा दिए गए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांत आज भी हमारे लोकतंत्र की आत्मा हैं. उत्तर प्रदेश सरकार उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है, ताकि एक समरस, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण हो सके.'
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