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Reels और Insta Story के जमाने में गुरबानी का पाठ करती है 4 साल की गुरनूर, माता-पिता से मिली सीख

आजकल के बच्चे जहां सोशल मीडिया के दीवाने हैं और फोन से नजरें नहीं हटाते, वहीं 4 साल की एक बच्ची सबके लिए मिसाल पेश कर रही है. यह कहानी है गुरनूर की जो इतनी कम उम्र में नियम से जापजी साहिब का पाठ करती है.

Gurnoor Kaur
gnttv.com
  • गुरदासपुर,
  • 23 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST
  • करती है गुरबानी और जापजी साहिब का पाठ 
  • माता-पिता से मिली सीख

आज डिजिटल जमाने में बच्चे भी एकदम डिजिटल हो रहे हैं. बच्चों को 3-4 साल की उम्र से ही मोबाइल फोन की लत लग रही है. आए दिन बच्चों के वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे होते हैं. सोशल मीडिया पर रील्स या स्टोरी बनाने में भी बच्चे पीछे नहीं हैं. और यह कहीं न कहीं चिंता का विषय है. 

लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी बच्ची के बारे में जो सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर है . और मात्र 4 साल की उम्र में वह कर रही है जो आजकल के युवा भी नहीं करते है. यह कहानी है 4 साल की गुरनूर कौर की. 

करती है गुरबानी और जापजी साहिब का पाठ 
पंजाब में गुरदासपुर के सीमावर्ती कस्बे फतेहगढ़ चुडियां के ग्राम पराचा के एक साधारण परिवार की बच्ची गुरनूर कौर नियम से गुरबानी और जापजी साहिब का पाठ करती है. गुरनूर को 10 गुरुओं के नाम, जाझारू खालसा और उनके द्वारा बोले गए गुरबानी के कई छंद जुबानी याद हैं.   

गुरनूर के पिता, गुरजाप सिंह गांव में दूध की डेयरी चलाते हैं और मां, सिमरनजीत कौर गृहिणी हैं. गुरनूर को यह शिक्षा अपने माता-पिता से ही मिली है. खासकर कि उनकी मां ने उन्हें इस राह पर आगे बढ़ाया है. 

माता-पिता से मिली सीख
गुरनूर के माता-पिता का कहना है कि हर बच्चे को अपने माता-पिता या घर के बड़े-बुजुर्गों से और बाद में समाज से संस्कार मिलते हैं. लेकिन शुरुआत अच्छी हो तो बच्चा कभी भटकता नहीं है. इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा से सही राह पर चलने की सीख दी.

उन्होंने बताया कि जब गुरनूर ढाई साल की थी तब से ही उसने गाना शुरू कर दिया था. और डेढ़ साल की लगातार मेहनत के बाद वह ईश्वर की कृपा से इतना अच्छा पाठ करने लगी है कि दूसरों को प्रेरणा दे रही है. गुरनूर को देखकर अब अन्य बच्चे भी गुरुद्वारा साहिब में जाकर पाठ करते हैं. 

सिमरनजीत कौर और गुरजाप सिंह का कहना है कि हमारे बच्चे  सिख इतिहास को भूल रहे हैं. उन्हें सिख इतिहास की जानकारी देने की बहुत जरूरत है और उन्हें गुरबाणी से जोड़ने की भी बहुत आवश्यकता है. 

(बिशंबर बिट्टु की रिपोर्ट)

 

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