साइबर सिटी गुरुग्राम में बिजली संकट ने विकराल रूप ले लिया है. हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) की ओर से एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने साइबर सिटी गुरुग्राम की रफ्तार पूरी तरह रोक दी है. दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के करीब 98% अधिकारियों और कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से शहर में व्यवस्था चरमरा गई है. ओल्ड गुरुग्राम के सर्कल-1 में 826 में से 816 कर्मचारी और सर्कल-2 में 557 में से 540 कर्मचारी काम से नदारद रहे. आधी रात से पूरा शहर अंधेरे में डूबा है. 7 घंटे में DHBVN (दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम) को 5500 शिकायतें मिल चुकी हैं. प्रशासन के हाथ-पांव फूले हैं. बिजली कर्मियों की हड़ताल से साइबर सिटी के दर्जनों इलाको में बिजली और पानी की सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई.
लोग कर रहे शिकायत... आखिर कब आएगी बिजली
सब-डिवीजन सेक्टर-2 ब्लॉक-बी, अशोक विहार फेज-2 व 3, सेक्टर-5, दयानंद कॉलोनी, सेक्टर-4, भीमगढ़ खेड़ी, पालम विहार सब-डिवीजन, सेक्टर-23, राजेंद्र पार्क, रतन विहार, विष्णु गार्डन और सेक्टर-105 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से बिजली कटौती की सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं. भीषण कटौती के चलते लोगों की रात आंखों ही आंखों में कटी और सुबह होते-होते पानी की किल्लत से हाहाकार मच गया.
हालात बद से बदतर
शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में भी हालात बद से बदतर बने हुए हैं. सोहना और फरुखनगर तहसील के दर्जनों गांवों और कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रहने से आम जनजीवन बुरी तरह पटरी से उतर चुका है. संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के टोल-फ्री नंबर पर 5,500 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. लगातार बजती फोन की घंटियों और शिकायतों के भारी अंबार के आगे हेल्पलाइन सिस्टम भी हांफता नजर आ रहा है.
पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमराई
बिजली गुल होने से जहां घरों में इन्वर्टर ठप हो गए और बूस्टिंग स्टेशनों पर बिजली न होने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई, वहीं औद्योगिक क्षेत्र भी इस संकट की चपेट में आ गए हैं. सेक्टर-37 और कादीपुर औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1,800 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का उत्पादन बुरी तरह ठप हो गया. डीजी सेट्स पर लगे GRAP प्रतिबंधों और डीजल जनरेटरों की सीमित क्षमता के कारण फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. वहीं इस मामले में बिजली विभाग के S.E श्यामवीर सैनी ने टेलिफ्यूनिक बातचीत में खुलासा किया कि सर्कल 1 के कई इलाकों में कल रात से बिजली की भारी किल्लत है और इसका सबसे बड़ा कारण है लगातार बढ़ते फाल्ट और हड़ताल पर गए कर्मचारी. श्यामवीर सैनी की माने तो हमारे सभी ट्रेंड कर्मचारी हड़ताल पर हैं, अब ऐसे में अनट्रेंड कर्मचारियों के बलबूते कैसे फाल्ट को ठीक किया जाए विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल
इस आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे तमाम एहतियाती कदम पूरी तरह नाकाफी और बेअसर साबित हो रहे हैं. ऐसे में सिस्टम की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब कर्मचारियों की हड़ताल की पूर्व सूचना प्रशासन और बिजली निगम के पास पहले से मौजूद थी, तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई. पूर्व चेतावनी के बावजूद बैकअप प्लान तैयार न करना प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है, जिसका खामियाजा आज लाखों बेकसूर नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.