Happy New Year 2022: ग्रीटिंग कार्ड से लेकर SMS तक...और अब सोशल मीडिया पर बधाई, पढ़िये किस तरह बदलता गया नए साल पर बधाइयों का दौर

मिलकर नए साल की बधाई देने से शुरू हुई कहानी ग्रीटिंग कार्ड से लेकर SMS और अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. वो भी एक दौर था...ये भी एक दौर है. हर दौर की अपनी कहानी है. लेकिन, इतना जरूर है कि ग्रीटिंग कार्ड का दौर देखने वाली पीढ़ियां उसे कभी भूल नहीं पाएगी. नए साल पर ग्रीटिंग कार्ड देकर एक दूसरे को शुभकामना देना हमेशा मीठी यादों में रहेगा.

एक दौर था जब लोग ग्रीटिंग कार्ड देकर एक दूसरे को नए साल की बधाई और शुभकामनाएं देते थे
आशुतोष रंजन
  • नई दिल्ली,
  • 01 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:37 AM IST
  • वो दौर...जब ग्रीटिंग कार्ड से सजी रहती थी दुकानें
  • जनवरी की सर्दी में रिश्तों की नरमाहट था ग्रीटिंग कार्ड
  • पहले फोन कॉल और SMS ने ली ग्रीटिंग कार्ड की जगह

Happy New Year 2022: नया साल दस्तक दे चुका है. सभी लोग एक दूसरे को नए साल की बधाई दे रहे हैं. एक दूसरे की खुशियों की कामना कर रहे हैं. न जाने कब से नए साल पर बधाई देने का ये सिलसिला चल रहा है. लेकिन, पिछले दो या कहें कि तीन दशक में नए साल पर बधाई देने के तरीके में काफी बदलाव आया है. मिलकर बधाई देने से लेकर ग्रीटिंग कार्ड का दौर...SMS से लेकर अब सोशल मीडिया तक, काफी कुछ बदल गया है.

वो दौर...जब ग्रीटिंग कार्ड से सजी रहती थी दुकानें
अस्सी-नब्बे के दशक में जन्मे लोग शायद ग्रीटिंग कार्ड का महत्व बहुत अच्छे से समझते होंगे. 15-20 सालों तक या कह सकते हैं कि करीब 25 सालों तक ग्रीटिंग कार्ड का खूब क्रेज रहा. दिसंबर की शुरुआत में ही दुकानें ग्रीटिंग कार्ड से सज जाया करती थीं. छोटे साइज से लेकर बड़े साइज के ग्रीटिंग कार्ड होते थे. 1 रुपए से लेकर 40-50 रुपए से ज्यादा तक के ग्रीटिंग कार्ड होते थे. अपनी पसंद के हिसाब से लोग कार्ड खरीदते थे.

जनवरी की सर्दी में रिश्तों की नरमाहट था ग्रीटिंग कार्ड
ग्रीटिंग कार्ड पर लोग नए साल की शुभकामनाओं के साथ शेरो-शायरी लिखते थे और अपने खास को देते थे. ग्रीटिंग कार्ड का महत्व सिर्फ नए साल पर शुभकामना संदेश लिखकर लोगों को देना नहीं होता था. ये प्यार और रिश्ते में अपनापन को बरकरार रखता था. संचार के तार मजबूती से जुड़े रहते थे. जनवरी की सर्दी में रिश्तों की नरमाहट को लोग महसूस करते थे. लोग सालों तक ग्रीटिंग कार्ड को संभालकर रखते थे. हर साल संजो कर रखी गई पुरानी यादों को देखते थे. ये नए साल पर बधाई देने का वो सुनहरा दौर था जो धीरे-धीरे खत्म होता चला गया और अब तो लगभग पूरी तरह ही खत्म हो चुका है.

पहले फोन कॉल और SMS ने ली ग्रीटिंग कार्ड की जगह
साल 2000 के बाद मिडिल क्लास फैमिली में धीरे-धीरे मोबाइल पहुंचना शुरू हुआ. लेकिन, तब तक भी ग्रीटिंग कार्ड का क्रेज काफी था. जब टैरिफ रेट सस्ते हुए तब धीरे-धीरे ग्रीटिंग कार्ड की जगह मोबाइल ने लेनी शुरू कर दी. लोग फोन पर ही एक दूसरे को नए साल की बधाई देने लगे. फिर SMS के जरिये ही नववर्ष की शुभकामनाएं दी जाने लगी. ये वो दौर था जब ग्रीटिंग कार्ड का क्रेज धीरे-धीरे कम हो रहा था. कम ही लोग एक-दूसरे को ग्रीटिंग कार्ड देते थे.

अब सोशल मीडिया पर ही बधाई
2009-10 से लोग फोन कॉल या SMS छोड़कर धीरे-धीरे सोशल मीडिया की तरफ शिफ्ट हुए. बधाई देने का सिलसिला अब सोशल मीडिया पर शुरू हुआ. इंटरनेट सस्ता होने के बाद तो लोग व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर के जरिये ही लोगों को बधाइयां भेजने लगे. कुछ लोग कहीं न्यू ईयर सेलीब्रेट कर रहे होते हैं तो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. अपने करीबी दोस्तों यारों को वीडियो कॉल करके बधाई देते हैं. मिलकर नए साल की बधाई देने से शुरू हुई कहानी ग्रीटिंग कार्ड से लेकर SMS और अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. वो भी एक दौर था...ये भी एक दौर है. हर दौर की अपनी कहानी है. लेकिन, इतना जरूर है कि ग्रीटिंग कार्ड का दौर देखने वाली पीढ़ियां उसे कभी भूल नहीं पाएगी.

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