बढ़ती गर्मी और लू से मधुमक्खियों पर खतरा, थोड़ी सावधानी से बचाई जा सकती हैं कॉलोनियां, शहद उत्पादन भी रहेगा बेहतर

कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि गर्मियों की शुरुआत में ही कॉलोनियों को छायादार स्थानों पर शिफ्ट कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पेड़ों के नीचे कॉलोनियां रखना सबसे बेहतर होता है, क्योंकि पेड़ों की पत्तियां तेज धूप को रोककर ठंडक देती हैं.

Honeybees: Photo: Unsplash
gnttv.com
  • हिसार,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

उत्तर भारत में मार्च से ही गर्मी का असर बढ़ने लगता है और मई-जून तक तापमान कई जगह 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस बार भी लू के दिनों में बढ़ोतरी और एल-नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है. इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि मधुमक्खियों पर भी पड़ रहा है. तेज गर्मी, पानी की कमी और फूलों में कम नैक्टर होने से मधुमक्खी कॉलोनियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे शहद उत्पादन भी प्रभावित होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी अपनाकर मधुमक्खियों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

छायादार जगह पर रखें कॉलोनियां
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि गर्मियों की शुरुआत में ही कॉलोनियों को छायादार स्थानों पर शिफ्ट कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पेड़ों के नीचे कॉलोनियां रखना सबसे बेहतर होता है, क्योंकि पेड़ों की पत्तियां तेज धूप को रोककर ठंडक देती हैं. यदि प्राकृतिक छाया उपलब्ध न हो तो फूस, टाट या अस्थायी शेड बनाकर भी व्यवस्था की जा सकती है.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मधुमक्खी पालक अपने एपियरी क्षेत्र में शहतूत जैसे पेड़ लगा सकते हैं, जो छाया के साथ-साथ मकरंद भी उपलब्ध कराते हैं.

साफ और ताजे पानी की व्यवस्था जरूरी
गर्मियों में मधुमक्खियां पानी का उपयोग शहद को पतला करने, बच्चों को भोजन देने और छत्ते का तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने के लिए करती हैं.

Honeybees

कुलपति प्रो. कंबोज ने बताया कि मधुमक्खी पालन स्थल के पास साफ और ताजा पानी की व्यवस्था जरूरी है. बहता पानी सबसे अच्छा माना जाता है, जबकि ट्यूबवेल या पंपिंग सेट के सीमेंटेड टैंक भी उपयोगी हो सकते हैं. छत्तों के स्टैंड के नीचे पानी से भरे मिट्टी के कटोरे रखने से मधुमक्खियों को पानी मिलता है और काली चींटियों का खतरा भी कम होता है.

छत्तों में भीड़ और गर्मी न बढ़ने दें
गर्मी में छत्तों के भीतर तापमान नियंत्रित रखना सबसे जरूरी माना जाता है. इसके लिए पर्याप्त फ्रेम उपलब्ध कराना चाहिए ताकि भीड़भाड़ न हो. दिन में 2-3 बार पानी में भीगी बोरी की पल्ली छत्तों के ऊपर रखने से तापमान कम रखने में मदद मिलती है. हालांकि बारिश के मौसम में यह व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए, वरना नमी बढ़ सकती है.

वायु संचार बनाए रखना भी जरूरी
गर्मी के मौसम में छत्तों में उचित वायु संचार बेहद जरूरी होता है. इसके लिए छत्ते का प्रवेश द्वार खुला रखना चाहिए. चैम्बर के बीच छोटे लकड़ी के टुकड़े लगाकर भी हवा के प्रवाह को बेहतर बनाया जा सकता है. छत्तों के आसपास की सूखी घास और कचरा साफ रखना चाहिए ताकि हवा का प्रवाह बना रहे और आग लगने का खतरा कम हो.

-प्रवीण कुमार की रिपोर्ट

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