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Pusa-2090: क्या यह नई वैरायटी हो सकती है पराली जलाने का समाधान, पूसा-44 वैरायटी से बेहतर विकल्प

IARI ने किसानों के लिए धान की नई किस्म तैयार की है- Pusa-2090. इस किस्म की खासियत है कि यह किस्म Pusa-44 की तुलना में ज्यादा जल्दी पककर तैयार होगी.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि फसल के अवशेषों को जलाना "तत्काल रोका जाए". सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष प्रकार के धान का भी उल्लेख किया, जो ज्यादातर पंजाब में उगाया जाता है. धान की यह किस्म और जिस समय अवधि में इसे उगाया जाता है, उसके कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने और इसके परिणामी प्रदूषण समस्याओं के प्रमुख कारणों के रूप में देखा गया. 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर में किसी किस्म का नाम नहीं था, लेकिन माना जा रहा है कि यह किस्म पूसा-44 का होने की संभावना है. यह वही किस्म है जिसके बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा था कि इसे अगले साल से "प्रतिबंधित" कर दिया जाएगा.

धान की पॉपुलर पूसा-44 किस्म 
नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा विकसित, पूसा-44 एक लंबी अवधि की किस्म है जिसे नर्सरी में बीज बोने से लेकर अनाज की कटाई तक परिपक्व होने में 155-160 दिन लगते हैं. इस प्रकार, एक महीने पहले नर्सरी की बुआई के बाद जून के मध्य में रोपाई की जाने वाली फसल अक्टूबर के अंत में ही कटाई के लिए तैयार होती है. जिस कारण अगली गेहूं की फसल बोने के लिए खेत की तैयारी के लिए बहुत कम समय बचता है. ऐसे में, नवंबर के मध्य से पहले, किसान कंबाइन मशीनों का उपयोग करके कटाई के बाद बचे हुए डंठल और भूसे को जला देते हैं ताकि खेत खाली हो सके. 

इस लंबी अवधि के बावजूद, जो बात पूसा-44 को किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है, वह यह है कि यह एक उच्च उपज देने वाली किस्म है - 35-36 क्विंटल प्रति एकड़, कुछ किसान 40 क्विंटल प्रति एकड़ भी उपज लेते हैं. इस किस्म की खड़ी पराली ही नवंबर की शुरुआत से बड़े पैमाने पर जलाई जा रही है. 

IARI ने बनाई नई किस्म 
आईएआरआई ने अब पूसा-44 का उन्नत संस्करण तैयार किया है, जिसका दावा है कि यह ज्यादा ही उपज देती है - लेकिन इसे तैयार होने में सिर्फ 120 से 125 दिन ही लगते हैं. इस किस्म का नाम है पूसा-2090. यह पूसा-44 और सीबी-501 का मिश्रण है, जो जल्दी पकने वाली जैपोनिका चावल प्रजाति है.  सीबी-501 किस्म 256-विषम जैपोनिका लाइनों में से एक थी. ये भारत और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इंडिका उप-प्रजातियों के विपरीत, पूर्वी एशिया में बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं.  इसे आईएआरआई ने फिलीपींस में लॉस बानोस में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से प्राप्त किया था.

ऐसा कोई कारण नहीं है कि इस किस्म को पंजाब और हरियाणा में जारी न किया जाए. पूसा-44 एक अधिक उपज देने वाली किस्म है जिसे किसान लगाना पसंद करते हैं. किसानों का कहना है कि अगर पूसा-2090 से कम अवधि में समान पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, तो सरकार को यहां इसकी खेती को मंजूरी दे देनी चाहिए.

 

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