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IAS Divya Mittal Resigns: चर्चित IAS दिव्या मित्तल ने 13 साल की नौकरी के बाद दिया इस्तीफा, सोशल मीडिया X पर लिखा- आज पद तो छूट गया, लेकिन वह सपना नहीं छूटेगा

IAS Divya Mittal Resigns: 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए अपने इस्तीफे की जानकारी दी है. उन्होंने लिखा है- आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS पद से त्यागपत्र दे दिया है.

IAS Divya Mittal Resigns
संतोष शर्मा
  • लखनऊ,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:46 AM IST

चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 सालों की सर्विस के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए अपने इस्तीफे की जानकारी दी है. दिव्या मित्तल यूपी के देवरिया, मिर्जापुर, संतकबीर नगर की डीएम रह चुकी हैं. वह वर्तमान में राजस्व परिषद में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं. फिलहाल दिव्या मित्तल की तरफ से भेजे गए इस इस्तीफा पर अभी उत्तर प्रदेश शासन की संस्तुति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्णय लेना है.

दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया X पर अपने पोस्ट में लिखा है- आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है. साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था. दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गई लेकिन 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था. अपने देश में न होना खलता था. मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत, सब इस मिट्टी का कर्ज था मुझ पर. वो कर्ज चुकाना था. चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों. सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला.

बहुत कुछ करने का मौका मिला 
दिव्या मित्तल अपने पोस्ट में लिखती हैं- बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा. देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है. मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है. मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है. सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था. इस जीवन का असली सुकून उन आंखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार जमीन का हक मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला. उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है.

मूर्ख थी जो सोचा था...
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं, सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया. लोग मेरी खुशी में मुझसे ज़्यादा खुश हुए. उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी. इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला कि मेरी झोली पूरी भर गई और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है, जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे.

आज आभार से आंखें हैं नम 
आज आभार से आंखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोली, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है.
आपकी अपनी, दिव्या मित्तल

 

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