प्रयागराज के संगम की रेत पर आस्था का विशाल पर्व माघ मेला जोर-शोर से शुरू हो गया है. यहां साधु-संतों के साथ भक्ति के रंग नजर आ रहे हैं और पारंपरिक मेला भी प्रारंभ हो चुका है. इसी माघ मेला क्षेत्र को अब एक प्राइवेट स्कूल ने अपनी छात्राओं के लिए प्रैक्टिकल शिक्षा का केंद्र बना दिया है, जहां धार्मिक आयोजनों की जानकारी दी जा रही है.
श्रद्धालुओं को स्वच्छता का मिला पाठ
स्कूल प्रशासन ने छात्र-छात्राओं को माघ मेला क्षेत्र में लाकर इसकी परंपराओं से रूबरू कराया. विवेकानंद जयंती के अवसर पर छात्राओं ने स्वच्छता का संदेश नाटक के माध्यम से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को दिया. उन्होंने बताया कि माघ मेला में स्वच्छता क्यों आवश्यक है, व्यवस्थाएं कैसे की जाती हैं,
मेले का महत्व क्या है. इसके अलावा, क्षेत्र में बहने वाली गंगा, यमुना और सरस्वती की परंपरा, अखाड़ों का स्वरूप तथा कल्पवास क्या होता है, इन सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई.
अरैल घाट पर लगी क्लास
माघ मेला पहुंची छात्राओं को प्रयागराज संगम अरैल घाट पर मेले के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने छात्राओं के साथ आस्था के इस केंद्र का भ्रमण कराया. प्रिंसिपल के अनुसार, "हम अपने स्कूल के बच्चों को माघ मेला का महत्व, पारंपरिक आयोजन और तीन नदियों के संगम के बारे में बताना चाहते हैं, ताकि वे अपनी संस्कृति से जुड़ें."
मेला क्षेत्र बना प्रैक्टिकल अड्डा
छात्राओं ने उत्साह से कहा कि उन्हें माघ मेला के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा. उन्होंने बताया, "हमने जाना कि माघ मेला क्या है, तीन नदियों का संगम कहां होता है, व्यवस्थाएं कैसे होती हैं. यह जानकारी कक्षा की किताबों से कहीं बेहतर लगी." एक ओर संगम की रेत पर साधु-संतों के दर्शन हो रहे हैं, वहीं यह क्षेत्र छात्राओं के लिए भारतीय परंपराओं को जानने का प्रैक्टिकल प्लेटफॉर्म बन गया है.
- आनंद राज की रिपोर्ट