कभी नक्सलियों के प्रभाव और खौफ के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर के कर्रे गुट्टा और आसपास के करीब 90 गांवों में इस बार आजादी का पर्व एक नई उम्मीद और उत्साह के साथ मनाया गया. आजादी के बाद पहली बार कर्रे गुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगा फहराया गया. इस ऐतिहासिक मौके पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप बाइक से यहां पहुंचे और जवानों की मौजूदगी में तिरंगा फहराया.
तिरंगा फहराते ही गूंज उठा भारत माता की जय का नारा
कर्रे गुट्टा की पहाड़ियों पर जैसे ही तिरंगा लहराया, पूरा इलाका भारत माता की जय और तिरंगे की जय के नारों से गूंज उठा. लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण जहां ग्रामीणों के लिए इन इलाकों में जाना और सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय पर्व मनाना मुश्किल था, वहीं अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद यहां लोकतंत्र और विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है. बस्तर तिरंगा यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने करीब 600 किलोमीटर लंबी बाइक यात्रा पूरी की. यात्रा बीजापुर से शुरू होकर आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी और ताड़पाला होते हुए कर्रे गुट्टा की पहाड़ी तक पहुंची.
90 गांवों में पहली बार पहुंचा तिरंगा
इस यात्रा के दौरान सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर समेत बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों के करीब 90 गांवों में पहली बार तिरंगा लहराया गया. यात्रा के दौरान मंत्रियों और सांसद ने अलग-अलग घटनाओं में शहीद हुए जवानों की याद में पौधारोपण किया और शहादत की मिट्टी भी संग्रहित की. उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात भी की.
करे्रगुट्टा पहुंचने पर ग्रामीणों और बच्चों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए. इससे पूरे इलाके में देशभक्ति का माहौल बन गया.
टेकलगुडेम में भी दिखा बदला हुआ माहौल
तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन देर रात उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री टेकलगुडेम पहुंचे. कभी घोर नक्सल प्रभावित माने जाने वाले इस इलाके में ग्रामीण देर रात तक उनका स्वागत करने पहुंचे. हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी लोग तिरंगा लेकर यात्रा के स्वागत के लिए पहुंचे. भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा के ग्रामीणों में भी उत्साह दिखाई दिया. वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कभी जिस रास्ते पर दिन में भी लोग आने से डरते थे, आज उसी रास्ते पर तिरंगा शान से लहरा रहा है. उन्होंने इसे बस्तर में बदलते हालात और मजबूत होती शांति का संकेत बताया.
करे्रगुट्टा और आसपास के इन 90 गांवों में पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने से ग्रामीणों में उत्साह है. लंबे समय तक भय के साए में रहे इस इलाके में अब तिरंगे के साथ शांति, विकास और लोकतंत्र की नई उम्मीद दिखाई दे रही है.
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