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India-Japan Military Exercise: भारत और जापान की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास Dharma Guardian एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को देगा बढ़ावा, यहां जानिए कैसे 

Dharma Guardian: भारत और जापान के बीच चलने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हो गया है, जो 9 मार्च 2025 तक जापान के पूर्वी फूजी युद्धाभ्यास प्रशिक्षण क्षेत्र में चलेगा. इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और  आतंकवाद रोधी अभियानों में सहयोग को मजबूत करना है.

India-Japan Military Exercise (Photo: PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 1:51 AM IST
  • 9 मार्च 2025 तक चलेगा भारत-जापान के बीच युद्धाभ्यास
  • भारत की तरफ से 120 सैनिक ले रहे हिस्सा

भारत (India) और जापान (Japan) की सेनाओं के बीच छठा धर्मा गार्डियन (Dharma Guardian) युद्धाभ्यास जापान के ईस्ट फूजी ट्रेनिंग सेंटर में चल रहा है. इस ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर करना, आतंकवाद विरोधी अभियान और शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देना है. यह अभ्यास 24 फरवरी को शुरू हुआ था, जो 9 मार्च 2025 तक चलेगा. इसमें भारत की तरफ से 120 सैनिक, जिनमें ज्यादातर मद्रास रेजिमेंट के जवान हैं शामिल हैं. जापान की ओर से ग्राउंड सेल्फ डिफेंस पोस्ट के 34वें इन्फेंट्री रेजिमेंट के सैनिक भाग ले रहे हैं.

सैन्य अभ्यास का महत्व
इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारत और जापान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना और एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखना है. इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की श्रेष्ठ अभ्यास सीख रहे हैं. युद्ध के मैदान में तालमेल बैठाकर लड़ाई लड़ने की रणनीतियों पर काम कर रहे हैं.

आतंकवाद विरोधी अभियान
इस अभ्यास में शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान की तैयारियों पर खास जोर दिया जा रहा है. दोनों सेनाएं जटिल परिस्थितियों में अभियान को अंजाम देने की रणनीतियों पर काम कर रही हैं और अपने रण कौशल को निखार रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानदंड
धर्मा गार्डियन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के लेड मैंडेट के मुताबिक भारत और जापान की सेना कई अलग-अलग सिनेरिओज़ को क्रिएट कर इसमें एक साथ युद्ध कौशल दिखा रहे हैं. भारतीय सेना अपने आधुनिक हथियारों के साथ इस अभ्यास में शामिल हुई है.  जापान भी अपने अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर इस कॉम्बैट ट्रेनिंग का हिस्सा बनी है.

सैनिकों के अनुभव साझा
इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की जा रही हैं, जो भविष्य में होने वाले संयुक्त अभियान के लिए उपयोगी साबित होंगी. यही वजह है कि सैन्य अभ्यास न केवल भारत और जापान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक होगा बल्कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने में भी अहम साबित होने वाला है.

भविष्य की तैयारियां
यह युद्धाभ्यास 9 मार्च तक चलेगा और इसके दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच तालमेल और बेहतर बनाने की कोशिशें जारी रहेंगी. इस अभ्यास से न केवल दोनों देशों की सेनाओं की युद्ध कौशल में वृद्धि होगी बल्कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी.
 

 

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