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करतारपुर कॉरिडोर को अभी क्यों खोल रहा है भारत?, हर एक वजह जानना जरूरी है...

केंद्र सरकार ने आज से करतारपुर कॉरिडोर को खोलने का निर्णय लिया है. जिसके कारण सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जा सकते हैं. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की जयंती से दो दिन पहले करतारपुर कॉरिडोर को खोला जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके इसके बारे में जानकारी दी. 19 नवंबर को गुरु नानक देव का प्रकाश उत्सव मनाया जाएगा. जिसके लिए बहुत से सिख लोग डेरा बाबा नानक और करतारपुर साहिब साहिब जाते हैं. 

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gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 17 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST
  • 19 नवंबर को है गुरु नानक जयंती
  • आज से खुल रहा है करतारपुर कॉरिडोर

केंद्र सरकार ने आज से करतारपुर कॉरिडोर को खोलने का निर्णय लिया है. जिसके कारण सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जा सकते हैं. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की जयंती से दो दिन पहले करतारपुर कॉरिडोर को खोला जा रहा है. 

गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके इसके बारे में जानकारी दी. 19 नवंबर को गुरु नानक देव का प्रकाश उत्सव मनाया जाएगा. जिसके लिए बहुत से सिख लोग डेरा बाबा नानक और करतारपुर साहिब साहिब जाते हैं. 

क्यों जरुरी है करतारपुर कॉरिडोर: 

करतारपुर कॉरिडोर से भारतीय तीर्थयात्री बिना वीज़ा भी पाकिस्तान में करतारपुर साहिब जा सकते हैं. करतारपुर कॉरिडोर को 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव' के गलियारे के रूप में जाना जाता है. यह भारत में डेरा बाबा नानक के शहर को पाकिस्तान के नरोवाल जिले में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा से जोड़ता है. 

यह 4.2 किलोमीटर लंबा मार्ग है. माना जाता है कि गुरु नानक देव ने अपने अंतिम दिन करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में बिताए थे. लेकिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान यह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया. फिर कई सालों तक लंबे प्रयासों के बाद आखिरकार करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई. 

हालांकि, मार्च 2020 से यह कॉरिडोर कोविड-19 के कारण बंद था. लेकिन अब इसे खोल दिया गया है ताकि इस प्रकाश उत्सव पर भारतीय तीर्थयात्री गुरूद्वारे में जाकर माथा टेक सकें.

क्या है इसका राजनैतिक महत्व: 

हालांकि, करतारपुर कॉरिडोर के खुलने का विषय सिर्फ लोगों के धर्म या आस्था से नहीं हुआ है. बल्कि राजनीती से भी इसका गहरा संबंध है. करतारपुर कॉरिडोर के खुलने की घोषणा पंजाब विधानसभा के चुनावों से पहले आई है, जो फरवरी 2022 में होने हैं. 

तो कहीं न कहीं यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह फैसला पंजाब में अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए लिया गया हो. बीजेपी का पंजाब में किसी भी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन नहीं है. और आज तक भारत के एकमात्र सिख-बहुल राज्य में कभी भी अपने दम पर सत्ता में नहीं रही है. 

साथ ही, नए कृषि कानूनों को लेकर राज्य में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी का माहौल है. बीजेपी की पंजाब यूनिट बीते रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली और उनसे कॉरिडोर को खोलने के लिए अपील की. इसके दो दिन बाद ही केंद्र सरकार ने बुधवार को कॉरिडोर खोलने का निर्णय लिया.

हालांकि, पिछले साल कॉरिडोर खोलने के इस्लामाबाद के प्रस्ताव को केंद्र ने अनसुना कर दिया था. और इस साल, अगस्त में भारत का कहना था कि पाकिस्तान की तरफ से कॉरिडोर खोलने में देरी हो रही है. क्योंकि अप्रैल 2021 से भारत में बढ़ते कोरोना के मामलों के कारण पाकिस्तान ने भारत से सभी यात्राओं को बैन किया हुआ था. 

लेकिन बाद में, अगस्त में ही पाकिस्तान ने कहा कि सितंबर में पड़ने वाली गुरु नानक की पुण्यतिथि पर वैक्सीन ले चुके तीर्थयात्रियों को ही कॉरिडोर से यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी.

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