India Today Conclave 2026: दुनिया जा रही 'कोल्ड वॉर 2.0' की तरफ.. अब लड़ाई सैनिक और हथियारों की नहीं, बल्कि तकनीक और साइबर वर्ल्ड की

जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट एडेल नाज़ेरियन के अनुसार यह स्थिति दुनिया में एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत का संकेत दे सकती है.

Geopolitical consultant Adelle Nazarian speaks at the India Today Conclave 2026 on Saturday
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग तरह की चर्चा हो रही हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत का संकेत भी हो सकता है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट एडेल नाज़ेरियन ने इसी विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा कि मौजूदा हालात को केवल युद्ध के रूप में देखना काफी नहीं होगा. उनके अनुसार यह स्थिति दुनिया में एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत का संकेत दे सकती है.

एडेल नाज़ेरियन ने कहा कि मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो किसी भी युद्ध से किसी को भी लाभ नहीं होता, लेकिन भू-राजनीतिक नजरिए से यह दौर दुनिया में शक्ति संतुलन को बदल सकता है. उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में वही देश अधिक मजबूत होकर सामने आएंगे जो बदलती वैश्विक व्यवस्था के साथ खुद को बेहतर तरीके से ढाल पाएंगे और नई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीतियां तैयार करेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया धीरे-धीरे एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जिसे “कोल्ड वॉर 2.0” कहा जा सकता है. हालांकि यह पहले के शीत युद्ध से काफी अलग होगा. उनके मुताबिक पहले के समय में युद्ध मुख्य रूप से सेनाओं और हथियारों के जरिए जमीन पर लड़े जाते थे, लेकिन अब संघर्ष का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. नाज़ेरियन के अनुसार नई वैश्विक प्रतिस्पर्धा का केंद्र अब तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और उन्नत सैन्य तकनीक पर आधारित होगा. उनका मानना है कि भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन इस बात से तय होगा कि कौन सा देश तकनीकी नवाचार और सैन्य क्षमताओं में सबसे आगे है.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में देशों के बीच नए तरह के गठजोड़ उभर सकते हैं. नाज़ेरियन के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी मौजूदा संघर्ष इस व्यापक भू-राजनीतिक बदलाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

उनका मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था कम टकराव वाली हो सकती है, लेकिन इसके पीछे तकनीक और रणनीतिक ताकत की बड़ी भूमिका होगी. उनके शब्दों में, यह सिर्फ एक युद्ध नहीं है, बल्कि उस नए दौर की शुरुआत है जिसमें दुनिया में शक्ति की परिभाषा और संतुलन दोनों बदलने वाले हैं.

 

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