77th Republic Day: जंग हुई तो दुश्मन के दांत खट्टे कर देंगे ये 7 हथियार, एक-एक के बारे में जान लें

आज हम आपको भारतीय सेना के ऐसे 7 हथियार और सिस्टम के बारे में बताने जा रहे हैं जो भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार किए जा रहे हैं. इनमें दिव्यास्त्र और शक्तिबाण रेजीमेंट, रोबोट‍िक म्‍यूल, ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार शामिल शामिल हैं.

77th Republic Day
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार कर्तव्य पथ पर भारत की सेनाएं खासतौर से उन हथियारों का प्रदर्शन कर रही हैं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे किए. बात चाहे ब्रह्मोस मिसाइल की हो या आकाश मिसाइल की. इस बार कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना ऐसे हथियार या सिस्टम दिखा रही है जो भविष्य की लड़ाई में दुश्मन पर वार करेंगी.

आज हम आपको भारतीय सेना के ऐसे 7 हथियार और सिस्टम के बारे में बताने जा रहे हैं जो भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार किए जा रहे हैं. इनमें दिव्यास्त्र और शक्तिबाण रेजीमेंट, रोबोट‍िक म्‍यूल, ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार शामिल शामिल हैं.

ब्रह्मोस मिसाइल: भारत ने जब से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस को उड़ाया, तब से दुनियाभर की नजरों में भारत का ये स्वदेशी अस्त्र आ गया है. अपनी सटीक मारक क्षमता और अचूक निशाने की वजह से ब्रह्मोस सुर्खियों में रहा. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ पाकिस्तानी सेना का पांव उखाड़े बल्कि भारत के घरेलू हथियारों को इंटरनेशनल मार्केट में पहुंच भी दी. खासतौर पर भारत-रूस के सहयोग से बनी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वालों की लाइन लग गई. ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है. इसकी रेंज 300 किमी है. स्पीड मैक 3 से ज्यादा. यह रैमजेट इंजन से चलती है. फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम है, मतलब लॉन्च करने के बाद खुद टारगेट को हिट करती है.

स्वदेशी तोप ATAGS: इन तोपों को डीआरडीओ, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, महिंद्रा डिफेंस नेवल सिस्टम और भारत फोर्ज लिमिटेड ने मिलकर बनाया है. यह तोप 155 mm/52 कैलिबर की है. हाल ही में राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसका सफल परीक्षण किया गया था. इस तोप को किसी भी स्थान पर ले जाकर तैनात किया जा सकता है. चाहे पाकिस्तान की सीमा हो या फिर चीन की सीमा के पास लद्दाख में. अगले डेढ़ साल में ये भारतीय सेना में शामिल हो जाएंगी. बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना को लंबे समय से स्वदेशी तोप की जरूरत है. आने वाले दिनों में भारतीय सेना में 1500 स्वदेशी तोप ATAGS शामिल होंगी.

ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार: ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार भारतीय सेना द्वारा ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग और उसे कंट्रोल करने के उपायों को दर्शाता है. इस सिस्टम से युद्ध के मैदान में ड्रोन को पीछे लाने के बजाय मौके पर ही रिपेयर किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेकर भारतीय सेना अब तेजी से ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम को अपनाती जा रही है. इस दिशा में सेना ने अपनी कई यूनिट को एक्टिव कर दिया है.

एम आर सैम- मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल: मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एम आर सैम) एक उच्च प्रतिक्रिया, त्वरित प्रतिक्रिया, लंबवत लॉन्च की गई सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे दुश्मन के हवाई खतरों- मिसाइल, विमानों, निर्देशित बमों, हेलिकॉप्टरों को बेअसर करने के लिए बनाया गया है. ऑपरेशन सिन्दूर में मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल ने सरहद पर पाकिस्तान के सैकड़ों हवाई हमलों को नाकाम किया.

आकाश मिसाइल सिस्टम: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तानी विमान, मिसाइल, ड्रोन आदि को नाकाम किया. इसी आपरेशन में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पीओके स्थित जिन कुल नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया. आकाश मिसाइल, आकाश तीर (Akash Teer) सिस्टम के साथ मिलकर, पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान के हवाई हमलों का जवाब देने के लिए तैनात थी और उसने कई हवाई लक्ष्यों को रोका. यह मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो लगभग 27 किमी की रेंज में काम करती है और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है.

दिव्यास्त्र और शक्तिबाण रेजीमेंट: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारतीय सेना को आक्रामक और घातक बनाने की प्रक्रिया में असरदार और दमदार काम हो रहा है. सेना के लिए जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन चल रहा है. इसी दिशा में सेना में बहुत तेजी से काम हो रहा है. उम्मीद है कि भारतीय सेना में अक्टूबर के आखिर तक 5 भैरव बटालियन, 5 दिव्यास्त्र बैटरी, 3 शक्तिबाण रेजिमेंट के साथ ही हर इंफ्रेंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून बन जाएगी. ये साफ तौर पर सेना की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य के संभावित खतरे और नई तकनीक के जोखिम भरे खतरों से निपटने की भी तैयारी है.

रोबोटिक म्यूल्स: तकनीक की दुन‍िया में आ रहे बदलाव के साथ अब भारतीय सेना भी तकनीक के साथ कदम से कमद म‍िलाकर चल रही है. सेना में अब रोबोट‍िक म्‍यूल को भी शाम‍िल कर ल‍िया गया है. इस बार गणतंत्र दिवस में सेना रोबोटिक म्यूल्स का प्रदर्शन कर रही है. रिहर्सल के दौरान भी इसे शाम‍िल क‍िया गया, ये रोबोट आपको कुत्‍ते की तरह द‍िखेंगे. आपको बता दें क‍ि ये हाइटेक रोबोट म्‍यूल, कुत्‍तों की तरह फुर्त‍िले और खुंखार भी है. दुश्‍मनों का पता लगते ही ये उन्‍हें पलभर में ढेर भी कर सकते हैं.

रिपोर्ट-मनजीत नेगी

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