सरोवर नगरी नैनीताल में कोविड के कारण 2 साल के इंतजार के बाद रविवार को राष्ट्रीय स्तर की 11वीं नैनीताल मानसून माउंटेन मैराथन बेहद रोमांचक रही. रन टू लिव संस्था के तत्वाधान में बेहद कठिन रास्तों और परिस्थितियों के कारण देशभर में आकर्षण का केंद्र रही. 21 किलोमीटर की मैराथन दौड़ को नागा रेजीमेंट के 24 वर्षीय चौहान संजय तंवर ने जीता.
महिला वर्ग में एकता ने मारी बाजी
जबकि कुमाऊं रेजीमेंट के परवीन बसेडा ने दूसरा और बागपत में धावक शिवा कुंदा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. महिला वर्ग में 21 किमी में एकता ने पहला, मुजफ्फरनगर की अर्पिता सैनी ने दूसरा और स्नेहल बिष्ट ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. जबकि वेट्रन वर्ग में 65 साल ने शिवेंद्र सिंह ने पहला, अशोक कुमार शर्मा ने दूसरा व जी सी एस बिष्ट ने तीसरा स्थान प्राप्त किया.
दुबई, गुवाहाटी, पुणे, मुंबई, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, केआरसी के जवान, उत्तराखंड पुलिस के जवान, स्कूली छात्रों व स्थानीय लोगों सहित लगभग 700 प्रतिभागियों ने मैराथन में भाग लिया. रेस में सब जूनियर, जूनियर और सीनियर कैटेगिरी के महिला और पुरुष वर्ग में स्कूल, हॉस्टल और फौजियों ने परफॉर्म किया.
'नैनीताल के ट्रैक बहुत अच्छे हैं'
मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भारतीय सेना के संजय तोमर ने कहा कि मैदान की अपेक्षा पहाड़ों में दौड़ना कठिन है. नैनीताल के ट्रैक्स बेहद कठिन हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक की तैयारी करने के लिए नैनीताल के ट्रैक बहुत अच्छे हैं.
नैनीताल में आयोजित हुई इस मैराथन में परवीन सिंह ने कहा कि मैराथन के बारे में कई बार सुना था, इस वजह से मैराथन में भाग लेने के लिए नैनीताल पहुंचे हैं. उनका लक्ष्य है कि देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाना, जिसकी तैयारियों के लिए नैनीताल में आयोजित हो रही मैराथन में परफॉर्म किया.
(रिपोर्ट - लीला सिंह बिष्ट )