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इंडिगो के विमान पर गिरी बिजली, लेकिन मुसाफिरों को नहीं हुआ नुकसान, आखिर क्या है सुरक्षा का विज्ञान, समझिए

आसमान में विमान पर बिजली गिरने से मुसाफिरों पर इसका कोई असर नहीं होता है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि विमान को इसके लिए खास तौर पर डिजाइन किया जाता है. विमान में खास मेटल का इस्तेमाल होता. जिसकी वजह से फैराडे केज सिद्धांत काम करता है और बिजली गिरने से मुसाफिरों को कोई नुकसान नहीं होता है.

When Lightning Strikes A Plane
शशिकांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:59 AM IST

पटना से लखनऊ जा रही इंडिगो की फ्लाइट आकाशीय बिजली की चपेट में आई गई. हालांकि पायलट की सूझबूझ से विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारा गया. जब विमान बिजली की चपेट में आया, उस समय वो करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर था. विमान में 104 मुसाफिर सवार थे. लेकिन किसी भी मुसाफिर को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

इस घटना के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब आसमान में विमान पर बिजली गिरती है तो क्या होता है? विमान पर उसका ज्यादा असर क्यों नहीं होता है? चलिए आपको इन सवालों के जवाब बताते हैं.

विमान पर बिजली गिरती है तो क्या होता है?
बिजली गिरने की बात सुनकर ही हम सहम जाते हैं. लगता है कि जरूर उस हादसे में किसी ना किसी की जान गई होगी या बड़ा नुकसान हुआ होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आसमान पर विमान पर बिजली करती है तो ज्यादा नुकसान नहीं होता है. ये सुनकर आप चौंक जाएंगे, लेकिन ये सच है. विमान को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि अगर आसमान में उसपर बिजली करती है तो मुसाफिरों को नुकसान ना हो.
बिजली गिरने के असर से बचने के लिए विमान को डिजाइन किया जाता है. विमानों की संरचना और सुरक्षा सिस्टम से बहुत एडवांस होते हैं, ताकि बिजली का प्रभाव मुसाफिरों तक ना पहुंच पाए.

क्या है सुरक्षा के पीछे का विज्ञान?
प्लेन की बाहरी परत को खास तौर पर डिजाइन किया जाता है. वो एल्यूमिनियम जैसी चालक धातु से बनी होती है. ये कंडक्टिव कोटिंग से लैस होते हैं. यह कोटिंग बिजली को विमान की बाहरी सतह से ही दूसरी तरफ मोड़ देती है. जिससे बिजली विमान के ऊपरी परत से गुजर जाती है. विमान को हल्का झटका जरूर लगता है. लेकिन बिजली कितनी भी ताकतवर क्यों ना हो, उसका असर मुसाफिरों पर नहीं पड़ता है.

फैराडे केज सिद्धांत करता है काम-
कॉकपिट से लेकर यात्री सीट तक, सबकुछ फैराडे केज के सिद्धांत पर आधारित होता है, जिससे बिजली बाहर की सतह पर ही रहती है. इस सिद्धांत में जब मेटल से बने फैराडे केज पर कोई बाहरी विद्युत क्षेत्र या विद्युत चुम्बकीय तरंगें टकराती हैं तो केज के भीतर मौजूद मुफ्त इलेक्ट्रॉन खुद को इस तरह से व्यवस्थित कर लेते हैं कि वे बाहरी विद्युत क्षेत्र के विपरित एक समान बल उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से अंदर मौजूद चीजों पर इसका असर नहीं पड़ता है. इसका मतलब है कि बिजली गिरती है तो इस सिद्धांत से मुसाफिरों को ना तो झटका लगता है और ना ही करंट महसूस होता है.

विमान के होते होते हैं छोट-मोटे नुकसान-
ऐसा नहीं है बिजली गिरने से विमान पर कोई असर नहीं पड़ता है. बिजली गिरने से विमान पर छोटे-मोटे असर होते हैं. बिजली के असर से विमान की बाहरी सतह पर जलने के निशान बन जाते हैं या खरोंच हो सकते हैं.

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