यूपी के 2 IPS अफसरों की शादी को लेकर यूपी में सियासी रंग भी चढ़ गया है. राजस्थान में हुई शादी में शामिल होना सपा के तीन विधायकों को भारी पड़ा है. इस शादी में उनके शामिल होने पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई है. सपा विधायकों पर अखिलेश के इस रुख से राजनीतिक गलियारों में ये अटकलें लगाई जानें लगी हैं, क्या अब तीनों विधायकों को अगले साल (2027) होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट गंवाकर इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी? हालांकि प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने तीना विधायकों को आपस में बात कर उन्हें समझाने की बात भी कही है.
अफसर की शादी में शामिल हुए 3 MLA शामिल-
बीते दिनों संभल एसपी केके बिश्नोई और बरेली की आईपीएस अंशिका वर्मा की राजस्थान के जोधपुर में शादी समारोह का आयोजन था. इस शादी में संभल और बरेली के अफसरों समेत कई जनप्रतिनिधि शादी में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. इनमें संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद, असमोली से सपा विधायक पिंकी यादव और गुन्नौर से सपा विधायक रामखिलाड़ी सिंह यादव भी शामिल होने पहुंचे थे. लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ये बात रास नहीं आई.
शादी में नहीं जाना चाहिए था- अखिलेश
गुरुवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान जब अखिलेश यादव से इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विधायकों को शादी में शामिल नहीं होना चाहिए था. हम लोग आपस में बातचीत करके समझाएंगे. अखिलेश यादव का ये बयान सपा विधायकों के प्रति नाराजगी साफ दिखने लगी है.
सपा मीडिया सेल ट्विटर हैंडल के जरिए भी विधायकों को यह संकेत मिला कि उन्हें उन अधिकारियों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए, जिन पर सरकार के करीब होने या पार्टी विरोधी रुख रखने का आरोप हो.
क्या बोलीं शादी में पहुंचने वाली सपा विधायक?
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई के जोधपुर में आयोजित रिसेप्शन में शामिल होने वाले समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों में से असमोली विधानसभा सीट से विधायक पिंकी यादव ने आज तक को कि हम लोग रिसेप्शन से पहले ही राजस्थान में परिवार के साथ मौजूद थे और रिसेप्शन समारोह निपटने के तीन दिन बाद अभी भी राजस्थान में ही परिवार के साथ मौजूद है. यह प्लान केवल रिसेप्शन समारोह में जाने के लिए नहीं बनाया गया था बल्कि परिवार के साथ पहले से ही तय था. व्यावहारिक तौर पर जाना ठीक समझा. इसलिए हम लोग रिसेप्शन में शामिल होने के लिए गए थे. राष्ट्रीय अध्यक्ष की हर आदेश का पालन किया जाएगा, हम लोग पार्टी के सिपाही हैं और अगर किसी भी स्तर पर हमारी कोई जरूरत पार्टी पर है तो हम पूरी तरह से पहले पार्टी के साथ खड़े हैं. जहां तक सोशल मीडिया अकाउंट से फोटो या रिसेप्शन से संबंधित पोस्ट डिलीट करने का सवाल है तो मेरे द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कोई भी पोस्ट नहीं की गई थी और इसको चेक भी कर सकते हैं. अगर किसी के पास कोई स्क्रीनशॉट हो तो वह दिखाएं हमारे द्वारा कोई भी पोस्ट डिलीट नहीं की गई है. बल्कि, हमारे रिसेप्शन में जाने को लेकर लोकल स्तर पर मुद्दा बनाया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.
प्रशासनिक अधिकारी की जवाबदेही जनता के प्रति- बीजेपी
इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपने शासनकाल में एक पाप किया था, जब उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह से राजनीतिक खांचों में बिठा दिया था. कुछ अधिकारी सपाई हो गए, कुछ अधिकारी बसपाई हो गए. जाति के आधार पर, भ्रष्टाचार के आधार पर जब भर्ती प्रक्रिया को लेकर चलते हैं तो पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को इसी तरह से तार-तार कर देते हैं. भारतीय जनता पार्टी यह मानती है कि यह प्रशासनिक अधिकारी, इनकी जवाबदेही जनता के प्रति है. ये सपाई, भाजपाई या कांग्रेसी नहीं हो सकते हैं. ये किसी जाति के खांचे में नहीं हो सकते हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाजवादी पार्टी अपने विधायकों को किसी अधिकारी के कार्यक्रम में निजी कार्यक्रम में जाने पर आपत्ति व्यक्त कर रही है जबकि सपा के मुखिया तो तमाम राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में स्वयं जाते हैं.
संभल बवाल के बाद चर्चा में आए थे IPS बिश्नोई-
नवंबर 2024 में संभल में हुए बवाल के बाद एसपी केके बिश्नोई काफी चर्चा में आए थे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संभल के पुलिस-प्रशासन को बवाल का जिम्मेदार ठहराते हुए कई गंभीर आरोप भी लगाए थे. संभल से पहले केके बिश्नोई गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर संभल हो गया था. संभल बवाल में कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 20 पुलिस अफसरों के खिलाफ केस दर्ज कराने का आदेश दिया था, लेकिन एसपी केके बिश्नोई ने किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर न लिखे जाने की बात कहते हुए हाईकोर्ट का रुख करने का कहा था. इस पर अखिलेश यादव ने आईपीएस केके बिश्नोई पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि यदि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अदालत के आदेश को अवैध बता रहे हैं, तो यह न्यायालय की अवमानना के दायरे में आ सकता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता की चापलूसी में कानून से ऊपर समझना महंगा पड़ सकता है. इस मामले पर संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है-न वर्दी, न ओहदा.
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