ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भारत आए हुए हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इंडिया टुडे ग्रुप एडिटर (फॉरेन अफेयर्स) गीता मोहन से बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कैसे हैं संबंध, अमेरिका और इजराइल के साथ जंग, प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर बात की.
भारत और ईरान के बीच हैं गहरे सांस्कृतिक संबंध
दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन शुरू होते ही एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींच लिया, यह तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियानके साथ हाथ में हाथ डालकर चलते हुए की है. भारत और ईरान के रिश्तों को दिखाने वाली इस तस्वीर पर गीता मोहन से खास बातचीत में पेजेश्कियान ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के साथ लगातार मजबूत होते रिश्तों का संकेत है. जब पेजेश्कियान से इस वायरल तस्वीर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, जब से मैंने राष्ट्रपति पद संभाला है, प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारे संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं.
ईरान भारत के साथ अपने रिश्तों को हर दिन और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, भारत और ईरान के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं और दोनों देशों का लंबा इतिहास रहा है. यह ऐसी चीज है, जो समय के साथ कभी नहीं बदलेगी. ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि हम दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं. पेजेश्कियान ने कहा कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच मजबूत सहयोग दुनिया में बढ़ते “तानाशाही रवैये” का मुकाबला करने में मदद कर सकता है. उनका यह बयान अमेरिका पर परोक्ष निशाने के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने कहा, हम अपने रिश्तों को अपनी गहरी और मजबूत संस्कृति के आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. मजबूत सहयोग दुनिया में बढ़ रहे तानाशाही रवैये का मुकाबला करने में हमारी मदद करेगा.
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण
ईरानी राष्ट्रपति की पीएम मोदी के साथ करीब 45 मिनट तक मुलाकात हुई, जिसमें चाबहार बंदरगाह में भारतीय निवेश और आपसी सहयोग पर चर्चा हुई. जब ईरान के राष्ट्रपति से पूछा गया कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. युद्ध और वहां हुए हमलों के बीच आपको चाबहार की भारत के लिए व्यावहारिकता कितनी मजबूत नजर आती है, तो ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि जहां तक चाबहार और भारत के साथ उसके संबंधों की बात है, ईरान एक बेहद महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति में स्थित है.
क्षेत्रीय परिवहन और संपर्क के लिहाज से ईरान एक चौराहा है. यह दक्षिण को उत्तर से और पश्चिम को पूर्व से जोड़ सकता है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैज्ञानिक संबंध विकसित करने का यह सबसे आसान और किफायती रास्ता है. अतीत में भी ईरान सिल्क रोड का हिस्सा रहा है और सभ्यताओं के बीच संपर्क इन्हीं रास्तों से विकसित हुआ था. अब हम इस मार्ग को फिर से सक्रिय कर सकते हैं. हम इसके लिए तैयार हैं और हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कही यह बात
भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कब और कैसे खुलेगा, इस पर ईरानी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित सिद्धांतों के तहत खोला जाएगा, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी. उन्होंने कहा कि ओमान के साथ एक विशेष समुद्री व्यवस्था पर बातचीत चल रही है और आगे अरब देशों के विदेश मंत्री भी ओमान के साथ बैठक करेंगे, ताकि इस पर समझौता हो सके. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ इस स्थिति की घोषणा करेगा. यह जवाब उस सवाल पर आया, जिसमें पूछा गया था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को यह भरोसा दिया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, क्योंकि भारत इस वजह से बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर पूछे गए एक दूसरे सवाल में कहा गया कि नाकेबंदी से दुनिया प्रभावित हो रही है और भारत भी इसकी गर्मी महसूस कर रहा है. इसी सवाल में राष्ट्रपति ट्रंप के इसे 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' नाम देने की बात और हूतियों, हिज्बुल्लाह और हमास की मदद से वहां की स्थिति पर भी सवाल किया गया. इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि न तो हिज्बुल्लाह ने और न ही ईरान ने इसकी शुरुआत की. उनके मुताबिक ये सभी समूह अपना बचाव कर रहे हैं और पहले हमला किसने किया, यह देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुश्मन हमला कर रहे हैं, क्षेत्र पर वार कर रहे हैं, रास्ते बंद कर रहे हैं और फिर उम्मीद करते हैं that ईरान कुछ न करे. कुल मिलाकर ईरानी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का रास्ता बातचीत, समुद्री व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय घोषणा से जोड़ा है, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका को नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी.
अगर हम जीवित हैं तो हमें जवाब देना होगा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा, अगर हम जीवित हैं तो हमें जवाब देना होगा. जब हम मर जाएंगे, तब जवाब नहीं दे पाएंगे. इसलिए हम जीवित हैं और जवाब देंगे. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर अमेरिका नाकेबंदी और प्रतिबंध खत्म करता है तो स्थिति बदल सकती है. उनके मुताबिक प्रतिबंधों का मतलब मरीजों को मारना, लोगों को बेरोजगार करना, गरीबी और असंतोष पैदा करना है.
अमेरिका को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वह युद्ध करना चाहता है तो उसे सैन्य कर्मियों से युद्ध करना चाहिए, आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब जब अमेरिका युद्ध के जरिए अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया तो वह आर्थिक गतिविधियों के जरिए ऐसा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसमें भी असफल होगा. उनके अनुसार ब्रिक्स ऐसा मंच है जो इस बंद रास्ते को खोल सकता है और व्यापार तथा आपसी संपर्क को बढ़ावा दे सकता है. उन्होंने क्षेत्रीय हालात, जवाबी कार्रवाई, प्रतिबंधों और ब्रिक्स की भूमिका पर भी अपनी बात विस्तार से रखी.
मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर चल रही अटकलों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने गीता मोहन के साथ बातचीत में साफ कहा कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं और अपना काम कर रहे हैं. पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका ईरान के ज्यादातर नेताओं को निशाना बना चुका है, लेकिन वह मोजतबा खामेनेई का पता लगाने में सक्षम नहीं है, उनके मुताबिक, यही वजह है कि अमेरिका की ओर से इस तरह का दुष्प्रचार किया जा रहा है.