अक्सर शादी-विवाह या बच्चे के जन्म लेने पर किन्नर घर आकर नेग या गिफ्ट की मांग करते हैं. लेकिन कई किन्नरों द्वारा नेग में इतने ज्यादा पैसे मांगे जाते हैं कि लोग उनका नेग नहीं दे पाते हैं. ऐसे में हिंसा व झड़प हो जाती है. हिंसा का कारण केवल यही रहता है कि जितना नेग किन्नर मांगते हैं, अगर वह ना दिया जाए तो वह खुश नहीं होते हैं.
भारत में ऐसे मौकों पर किन्नरों को नेग व गिफ्ट देने की परंपरा काफी समय से चली आ रही है. अब जब परंपरा पहले से ही चली आ रही है तो इससे किन्नरों के भी हौसले बुलंड हो जाते हैं, जिसके चलते वह नेग भी बड़े-बड़े मांगते है. जिन्हें कई बार पूरा कर पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में एक सवाल खड़ा होता है कि क्या किन्नरों द्वारा नेग मांगने की इस परंपरा को कानून किस रूप से देखता है.
कानून की नजर में जबरन नेग वसूली अवैध
इस सवाल का जवाब एक इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर एक किन्नर की याचिका से खुद मिल जाता है. दरअसल गोंडा के रहने वाले एक किन्नर ने कोर्ट में याचिका दर्ज की थी, कि उसके इलाके में कोई दूसरे समुदाय के किन्नर आकर नेग वसूल रहे हैं. नेग वसूलने को लेकर असल में किन्नरों के बीच इलाका तय होता है. अमूमन किसी एक समुदाय का किन्नर केवल अपने ही इलाके में नेग वसूलता है.
याचिका दायर करने वाले किन्नर ने अपने लिए सुरक्षा कि मांग की थी, ताकि वह अपने इलाके में बिना किसी परेशानी नेग वसूली कर सके. जिसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि नेग वसूली कानून की नज़र में अवैध है, क्योंकि इसको लेकर कोई कानून नहीं बना है. साथ ही वह याचिका को देखते हुए सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है. कोर्ट के मुताबिक कानूनी रूप से किसी भी नागरिक से टैक्स, सेस या फीस के अलावा किसी और प्रकार की मांग नहीं की जा सकती है.
नेग वसूली पर क्या कहता है कानून
कोर्ट ने साफ लफ्ज़ों में कहा कि इस याचिका पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता, जब तक कोई अन्य कोर्ट नेग वसूली की प्रक्रिया को वैध न करार देदे. यानी किन्नरों द्वारा शुभ मौकों पर मांगा जाने वाला नेग फिलहाल कानूनी रूप से अवैध है. साथ ही ट्रांसजेंडर पर्सन एक्ट 2019 में भी नेग को लेकर किसी भी प्रकार का प्रावधान नहीं दिया गया है.