बराक वैली के सिलचर में साल 2004 के चर्चित मुन्ना मजूमदार हत्याकांड में आखिरकार 22 साल बाद न्याय मिल गया है. इस खौफनाक घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिला दिया था. लंबे इंतजार के बाद बुधवार, 25 फरवरी 2026 को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट), कछार के न्यायाधीश बैंकिम शर्मा की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है.
तीन आरोपियों को मिली सजा
अदालत ने कपड़ा व्यापारी धनराज सुराना (स्वरूपा कॉम्प्लेक्स, जनिगंज, सिलचर निवासी) और उनके दो कर्मचारियों रतन देबनाथ तथा रिंकू देब उर्फ माधुसूदन देब (दोनों उद्धारबंद निवासी) को दोषी करार दिया.
मृतक मुन्ना मजूमदार शिव कॉलोनी, सिलचर के रहने वाले थे और धनराज सुराना की सुराना गारमेंट्स नाम की दुकान में काम करते थे. अदालत ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 (साझा इरादे से हत्या) के तहत दोषी ठहराया. साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
2004 में हुई थी संदिग्ध मौत
मामले के अनुसार, 5 नवंबर 2004 को धनराज सुराना और उनके दोनों कर्मचारी मुन्ना मजूमदार को सिलचर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. मुन्ना की मौत की परिस्थितियां संदिग्ध होने के कारण शहर में आक्रोश फैल गया था.
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था. इस घटना ने उस समय पूरे सिलचर क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था.
लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली. गवाहों के बयान और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई. करीब 22 साल बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार और पूरे इलाके के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है.
(रिपोर्ट- दिलीप कुमार सिंह)
ये भी पढ़ें