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1 मिनट में 25 शब्द भी नहीं कर पाए टाइप, चपरासी बनाए गए 3 जूनियर क्लर्क

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अनोखा मामला सामने आया है. जिले में 3 बाबुओं को चपरासी बना दिया गया है. दरअसल तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी. नियम के मुताबिक एक साल में टाइपिंग की परीक्षा पास करनी थी. लेकिन ये इसमें पास नहीं कर पाए.

Peon (Photo/Meta AI)
gnttv.com
  • कानपुर,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:24 AM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. ये मामला बेहद अलग माना जा रहा है, जहां टाइपिंग परीक्षा में निर्धारित मानक पूरा न कर पाने पर कर्मचारियों को पद घटाने की कार्रवाई का सामना करना पड़ा. कलेक्ट्रेट में कार्यरत 3 कनिष्ठ लिपिक एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने की अनिवार्य गति हासिल नहीं कर सके, जिसके चलते उन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेज दिया गया. पहली बार असफल होने पर उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी, जबकि दूसरी बार भी परीक्षा में सफल न होने पर जिलाधिकारी के आदेश से यह सख्त कदम उठाया गया.

एक साल में नहीं सीख पाए टाइपिंग-
प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत कनिष्ठ लिपिक के रूप में हुई थी. नियमों के अनुसार, उन्हें एक वर्ष के भीतर टाइपिंग परीक्षा पास करना जरूरी था. वर्ष 2024 में आयोजित पहली परीक्षा में वे निर्धारित गति हासिल नहीं कर पाए, जिसके बाद उनकी वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई.

चपरासी बनाए गए 3 जूनियर क्लर्क-
इसके बाद वर्ष 2025 में उन्हें दोबारा मौका दिया गया, लेकिन इस बार भी तीनों कर्मचारी परीक्षा में सफल नहीं हो सके. लगातार दूसरी बार असफल रहने पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने आदेश जारी करते हुए डीएम कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव और कलेक्ट्रेट में कार्यरत नेहा श्रीवास्तव व अमित कुमार यादव का पद घटाकर उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना दिया.

मृतक आश्रित कोटे में हुई थी नियुक्ति-
लगातार दो बार टाइपिंग परीक्षा में असफल रहने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कर्मचारियों का पद कम करने का निर्णय लिया. जिलाधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई अमल में लाई गई. तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी, जहां पहली बार असफल होने पर उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी. दूसरी बार भी परीक्षा पास न कर पाने पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई.

(सिमर चावला की रिपोर्ट)

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