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Katihar Boat School Story: "ई बिहार है बाबू!" बाढ़ में डूबा गांव, तो शिक्षक ने नाव को ही बना दिया क्लासरूम, देखें वायरल तस्वीर

"सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं." राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की इन पंक्तियां को सच कर दिखाया है बिहार के शिक्षक मोहम्मद साहेब ने. ऐसा लगता है बाढ़ बिहार की नियति का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन इस हालात से घबराने की जगह शिक्षक और विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो कई सालों तक लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का काम करेगी.

बाढ़ के कारण नाव को बनाया स्कूल
बिपुल राहुल
  • कटिहार ,
  • 15 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ ने तबाही मचा दी है. ऐसे में कटिहार जिले के 7 प्रखंड बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं और 9 लाख 39 हजार 766 की आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है. बिहार के बच्चे हमेशा से शिक्षा के क्षेत्र में देश और दुनिया में अपना डंका बजाते हैं. इसमें शिक्षकों की भूमिका भी मुख्य रहती है. ऐसे मुश्किल वक्त में कटिहार के सुदूर बाढ़ प्रभावित इलाके से ग्राउंड जीरो की एक बहुत ही खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जो बताती है कि बाढ़ जैसी आपदा के बीच भी बच्चे और शिक्षक पढ़ाई को लेकर सजग और दृढ़संकल्पित हैं.

पूरा गांव पानी में डूबा, फिर भी पढ़ाई जारी
यह इलाका कटिहार जिले के सुदूर प्रखंड अमदाबाद के रघुनाथपुर का है. पूरा गांव बाढ़ में डूबा हुआ है और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है. घर, सड़क और स्कूल तक पानी में डूब चुके हैं. बाढ़ के पानी का जलस्तर कम होने के बाद भी सबकुछ सामान्य होने में वक्त लगता है. वैसे भी इस इलाके की नियति है कि हर साल यहां के लोगों को बाढ़ की त्रासदी से जूझना पड़ता है. ऐसे हालात में प्राइवेट कोचिंग चलाने वाले शिक्षक मोहम्मद साहेब का एक ही उद्देश्य है, बच्चों के बीच शिक्षा पहुंचाना. इसी जज्बे के साथ वह पानी से घिरे और डूबे स्कूल से सटे स्थान पर नाव में सुरक्षित तरीके से पाठशाला चला रहे हैं. नाव पर छात्र अपने शिक्षक मोहम्मद साहेब से शिक्षा ले रहे हैं. बाढ़ ने भले ही स्कूल और रास्तों को डुबो दिया हो, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का सिलसिला नहीं रुका है.

कम पानी वाली जगह पर चल रही है नाव की कक्षा
नाव पर चल रही पाठशाला छात्र-छात्राओं के लिए जोखिम भरी है या नहीं, इसकी ग्राउंड जीरो पर पड़ताल की गई. इसमें पता चला कि जिस जगह नाव पर पाठशाला चल रही है, वहां पानी बिल्कुल कम है. ऐसे में नाव पर पाठशाला बिल्कुल सुरक्षित है. पढ़ाई करने वाले सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की सहमति है. शिक्षक खुद बच्चों को नाव से सुरक्षित तरीके से लेकर आते हैं और पढ़ाई के बाद सभी को सुरक्षित उनके घर पहुंचा देते हैं.

बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो, इसलिए उठाया कदम
शिक्षक बताते हैं कि बाढ़ का असर लंबे समय तक रहता है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित होने से उनके भविष्य पर असर पड़ेगा और उनके स्किल डेवलपमेंट पर भी असर पड़ेगा. इसलिए बच्चों के भविष्य और उनके स्किल को लगातार बनाए रखने के लिए नाव पर पाठशाला चलाई जा रही है. शिक्षक यह भी बताते हैं कि हर साल आने वाली बाढ़ जैसी आपदा के बीच पले-बढ़े बच्चों को खतरों से खेलना भी आता है. उनका कहना है, "ई बिहार है और हमलोग पढ़ने-लिखने और शिक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं." उनके मुताबिक नाव पर पाठशाला चलने से कोई खतरा नहीं है, क्योंकि यहां पानी बहुत कम है और यह शांत जगह है. पीछे स्कूल, सड़क और घर सभी डूबे हुए हैं.

बच्चों को भी नहीं लगता डर
नाव पर चल रही पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि सभी जगह घर, कोचिंग और सड़क पर पानी है. यहां पानी कम होने की वजह से सर खुद उन्हें लेकर आते हैं और पढ़ाते हैं. 5वीं कक्षा के छात्र सत्यम बताते हैं कि पानी कम होने की वजह से गार्जियन की अनुमति है और वह सर के साथ नाव की पाठशाला में पढ़ने आते हैं. वहीं कक्षा 6 की छात्रा अन्नू भी बताती हैं कि पानी कम होने की वजह से नाव पर पढ़ाई करने में डर नहीं लगता. पढ़ने में मन लगता है. सर एक से डेढ़ घंटे पढ़ाते हैं, ऐसे में पढ़ना जरूरी है.

बाढ़ ने रास्ता छीना, शिक्षा पाने का जज्बा नहीं
सुकून देने वाली "नाव पर पाठशाला" की यह तस्वीर एक बड़ा संदेश देती है कि बाढ़ ने राह जरूर छीनी, लेकिन शिक्षा पाने का जज्बा नहीं छीन सकी. मोहम्मद साहेब सर के जज्बे को भी सलाम, जिन्होंने बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाने के लिए नाव को ही पाठशाला बना डाला. परिस्थितियां भले रास्ता रोक दें, लेकिन रुकावट के बाद भी रास्ता ढूंढकर मंजिल हासिल कर लेना एक बड़ी जीत है. ई बिहार है और यहां के लोग डंके की चोट पर अपनी काबिलियत पूरी दुनिया को दिखाते हैं.
 

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