इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध में शिया मुसलमानों की चर्चा हो रही है. अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत में भी उत्तर प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक प्रदर्शन हुए हैं. इस बीच सियासत में भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. भारत में सियासी तौर पर शिया समुदाय की पकड़ ठीक-ठाक है. इस समुदाय से कई बड़े लीडर निकले हैं. चलिए आपको शिया मुसलमानों से निकले बड़े लीडर्स के बारे में बताते हैं.
मुख्तार अब्बास नकवी-
बीजेपी की दिग्गज लीडर और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी शिया समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. मुख्तार नकवी साल 2002 से 2022 तक राज्यसभा सांसद रहे. नकवी साल 2021 से 2022 के बीच राज्यसभा में उपनेता भी रहे.
मुख्तार अब्बास नकवी ने साल 1998 में यूपी के रामपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से अपना पहला चुनाव जीता था. नकवी अटल सरकार में केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री रहे. नकवी को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय सौंपा गया.
नकवी का जन्म 15 अक्टूबर 1957 को प्रयागराज में हुआ था. उन्होंने आर्ट्स और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की. नकवी सिर्फ 17 साल की उम्र में छात्र नेता बन गए थे. नकवी इमरजेंसी में जेल भी गए थे.
बुक्कल नवाब-
बुक्कल नवाब शिया समुदाय के बड़े सियासी चेहरा रहे हैं. उन्होंने कई पार्टियों में रहकर सियासत की है. बुक्कल नवाब पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. बुक्कल नवाब भगवान हनुमान को मुसलमान बताने की वजह से चर्चा में आए थे.
बुक्कल नवाब साल 1992 में समाजवादी पार्टी से जुड़े थे. वे दो बार पार्टी के महासचिव रहे थे. उन्होंने 2 बार चुनाव भी लड़ा था. लेकिन सफलता नहीं मिली थी. पार्टी ने बुक्कल को 2012 और 2016 में परिषद में भेजा था. बुक्कल को समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता था.
बुक्कल नवाब ने सियासी पारी की शुरुआत साल 1989 में की थी, जब उन्होंने लखनऊ नगर निगम के चुनावों में दौलतगंज वार्ड से निर्दलीय जीत दर्ज की थी.
मोहसिन रजा-
बीजेपी लीडर मोहसिन रजा भी शिया समुदाय से आते हैं. मोहसिन रजा योगी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. मोहसिन रजा साल 1996 से ही बीजेपी विचारधारा से जुड़े हैं. लेकिन आधिकारिक तौर पर साल 2013 में बीजेपी से जुड़े. इसके लिए उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी थी.
रजा एक शिया समुदाय से आते हैं. वो जमींदारों के परिवार से आते हैं. जिनकी विरासत सूफी सफीपुर शहर से जुड़ा है. उनका जन्म 15 जनवरी 1968 को उन्नाव में हुआ था. उन्होंने रणजी ट्रॉफी में यूपी का प्रतिनिधित्व किया है.
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