योग कार्यक्रम में गांव की महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए. सभी ने नाव पर बैठकर विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए. आमतौर पर योग दिवस के आयोजन मैदानों, पार्कों और बड़े सभागारों में होते हैं, लेकिन मधुवन प्रताप गांव के लोगों ने अपनी परिस्थितियों को ही अपनी ताकत बना लिया और नदी के बीच योग कर एक नई पहचान बनाई.
बाढ़ प्रभावित गांव की अलग कहानी
ग्रामीणों ने बताया कि मधुवन प्रताप गांव में आज भी आवागमन का प्रमुख साधन नाव ही है. विशेष रूप से बरसात के मौसम में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है और लोगों की दैनिक गतिविधियां नाव के सहारे ही चलती हैं. ऐसे में गांव के लोगों ने अपनी इसी जीवनशैली को योग दिवस से जोड़ते हुए नाव पर योग करने का फैसला लिया. यह पहल न सिर्फ अनोखी रही बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा का कारण भी बनी.
योग से स्वस्थ जीवन का संदेश
कार्यक्रम में शामिल दीपू सहनी ने कहा कि योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है. उन्होंने लोगों से रोजाना योग करने की अपील करते हुए कहा कि नाव पर योग कर गांव के लोग देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि योग किसी विशेष स्थान या संसाधन का मोहताज नहीं है. यदि इच्छा और संकल्प हो तो किसी भी परिस्थिति में योग किया जा सकता है.
चर्चा का विषय बनी ग्रामीणों की पहल
ग्रामीणों का मानना है कि योग केवल बड़े शहरों या आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है. इसे कहीं भी और किसी भी परिस्थिति में अपनाया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मधुवन प्रताप गांव की यह अनोखी पहल अब क्षेत्रभर में चर्चा का विषय बन गई है. बागमती नदी के बीच नाव पर किया गया यह योगाभ्यास लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ यह भी सिखा रहा है कि चुनौतियों के बीच भी सकारात्मक सोच और अनुशासन के साथ बेहतर जीवन जिया जा सकता है.
(रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा)
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