लंबे इंतजार और गहन मंथन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की नगर परिषदों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. रविवार को नगरीय निकायों में एल्डरमैन के नामों की घोषणा की गई. पहली सूची में 25 जिलों की 123 नगर परिषदों के लिए अधिकतम 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं.
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 19(1) (ग) के तहत की गई हैं. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन मनोनीत पार्षदों का कार्यकाल संबंधित नगर परिषद के मौजूदा कार्यकाल के साथ समाप्त होगा या शासन के आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा. एल्डरमैन के नामों की घोषणा नगरीय निकायों की सबसे शुरुआती इकाई यानी नगर परिषद स्तर से शुरू की गई है.
इन 25 जिलों की परिषदों में नियुक्तियां
जिन जिलों की नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, उनमें सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर और नीमच शामिल है. इन सभी नगर परिषदों में अधिकतम चार-चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं.
क्या होते हैं एल्डरमैन और क्या हैं अधिकार?
प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति का आधार आमतौर पर प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका कानून की समझ मानी जाती है. संगठन की सिफारिश पर नियुक्त ये मनोनीत पार्षद परिषद की बैठकों और चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं.
निकाय चुनाव से पहले रणनीतिक कदम?
राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इन नियुक्तियों को सिर्फ औपचारिकता नहीं माना जा रहा. सूत्रों के अनुसार, भाजपा आगामी निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए अनुभवी और पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका में लाने की रणनीति पर काम कर रही है.
(रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट)