शिवसेना (UBT) को संसद में एक और बड़ा झटका, संसदीय दल का ऑफिस भी छिनने का खतरा

महाराष्ट्र की शिवेसेना (UBT) पर सांसदों के बगावत के बाद एक और खतरा मंडराने लगा है. सूत्रों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सिर्फ 4 सांसद ही रह जाएंगे. ऐसे में शिवसेना यूबीटी को संसद भवन के कार्यालय से भी हाथ धोना पड़ सकता है.

Shiv Sena (UBT)
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

महाराष्ट्र की राज्य की सत्ता गंवाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) एक और बड़ा झटका लगा है. शिवसेना (UBT) में घमासान मचा हुआ है. साल 2024 लोकसभा में जीत हासिल करने वाले 6 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है. लेकिन पार्टी के लिए सिर्फ बगावत ही मुसीबत नहीं है, एक और मुसीबत उद्धव ठाकरे का इंतजार कर रही है. लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (यूबीटी) को अब संसद में एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. पार्टी के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय के बाद न सिर्फ उसकी संसदीय ताकत घटेगी, बल्कि संसद भवन परिसर में मिले उसके कार्यालय पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

शिवसेना (UBT) से छीन सकता है संसद भवन का ऑफिस-
सूत्रों के अनुसार इस घटनाक्रम को लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल में केवल चार सांसद ही शेष रह जाएंगे. संसद की प्रचलित व्यवस्था के तहत सामान्यतः पांच या उससे अधिक सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में अलग कार्यालय आवंटित किया जाता है. ऐसे में पार्टी को अपने वर्तमान कार्यालय से हाथ धोना पड़ सकता है.

क्या है नियम?
यही नहीं, सांसदों की संख्या घटने का असर राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों में उसकी भागीदारी पर भी पड़ सकता है. महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में आमतौर पर पांच से कम सांसदों वाले दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता. ऐसे में भविष्य में शिवसेना (यूबीटी) की इन बैठकों में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

कमरा नंबर 128A है ऑफिस-
फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल का कार्यालय संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के कमरा नंबर 128A में स्थित है. यह कार्यालय अविभाजित शिवसेना को आवंटित कमरे नंबर 128 के ठीक बगल में है. सांसदों की संख्या में संभावित कमी के बाद इस कार्यालय के आवंटन की स्थिति पर भी नजरें टिकी हुई हैं.

ये भी पढ़ें:

 

Read more!

RECOMMENDED