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सजा के बाद डस्टबिन में फेंका पेन, महाभारत का जिक्र... नीले ड्रम केस में जज के अंदाज की चर्चा

मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में दोषी साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई गई है. सजा सुनाने वाले जज अरविंद कुमार मिश्रा के अंदाज की चर्चा हो रही है. सजा सुनाने के बाद उन्होंने पेन डेस्टबिन में डाल दिया. इसके पहले सजा सुनाने की शुरुआत उन्होंने महाभारत की 2 पंक्तियों के साथ की.

Meerut Blue Drum Murder Case
हिमांशु मिश्रा
  • मेरठ,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में दोषी साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा का अंदाज पूरे मेरठ कचहरी परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है. फैसला सुनाने से पहले महाभारत का जिक्र, न्याय को लेकर अपनी बात और सजा सुनाने के बाद इस्तेमाल किए गए पेन को डस्टबिन में डाल देना- जज साहब के इस अंदाज की कचहरी में खूब चर्चा हो रही है. बताया जा रहा है कि जज अरविंद कुमार मिश्रा ने अपनी सीट पर बैठते ही महाभारत की 2 पंक्तियों के साथ फैसले की शुरुआत की और फिर दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुना दी.

अपराध की गम्भीरता के अनुसार दंड देना न्यायिक धर्म-
सजा पर फैसला सुनाने से पहले जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधी ने जैसा अपराध किया है, उसके अनुसार उसे दंड देना न्यायिक धर्म है. इसके बाद उन्होंने बाघ और जंगल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बाघ जंगल में है, तो जंगल सुरक्षित है और अगर जंगल बचा है, तो बाघ भी सुरक्षित है. कानून मनुष्य के लिए बनाया गया है. मनुष्यों की सुरक्षा करता है. उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है. ये समाज मे संदेश जाना बहुत आवश्यक है.

सजा सुनाने के बाद डस्टबिन में डाला पेन-
जज साहब की इस बात को न्याय और व्यवस्था के बीच संतुलन के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. फैसले के बाद उनका अपना पेन डस्टबिन में डालने का अंदाज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

5 महीने पहले संभाला था कार्यभार-
इलाहाबाद के रहने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने करीब पांच महीने पहले ही मेरठ जिला अदालत का कार्यभार संभाला था. इससे पहले वह बिहार न्यायिक सेवा में अभियोजन अधिकारी के तौर पर भी काम कर चुके हैं. मेरठ जिला अदालत में उन्हें मिलनसार और हंसमुख स्वभाव का जज बताया जाता है. मेरठ जिला कोर्ट के सरकारी वकील के.के. चौबे के मुताबिक, जज अरविंद कुमार मिश्रा कई गंभीर मामलों और विवादों में वकीलों के बीच पहुंचकर आपसी सुलह कराने के लिए भी जाने जाते रहे हैं. मेरठ बार एसोसिएशन से जुड़े मामलों में भी उनके इस व्यवहार की चर्चा होती रही है.

मेरठ में 23 साल बाद फांसी की सजा-
मेरठ के कोर्ट ने अब तक तीन और दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. नीला ड्रम हत्याकांड में साहिल और मुस्कान को सुनाई गई फांसी की सजा के बाद मेरठ में करीब 23 साल बाद मृत्युदंड का फैसला चर्चा में है. इससे पहले साल 2003 में मेरठ में एक डॉक्टर को फांसी की सजा सुनाई गई थी.
नीला ड्रम हत्याकांड का फैसला जहां अपराध की गंभीरता को लेकर चर्चा में है, वहीं जज अरविंद कुमार मिश्रा के फैसले सुनाने के अंदाज, महाभारत के संदर्भ और पेन डस्टबिन में डालने की घटना ने भी मेरठ कचहरी में लोगों का ध्यान खींचा है.

कौन हैं अरविंद मिश्रा?
अरविंद कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम बीपी मिश्रा है. मूल रूप से मऊ के रहने वाले मिश्रा पिछले करीब 23 वर्षों से अधिक समय से न्यायपालिका में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

2003 में पहली बार बने थे स‍िव‍िल जज-
अरव‍िंद कुमार मिश्रा की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने वर्ष 1990 में स्नातक (बीए), 1994 में एलएलबी (LL.B.) और 1996 में एलएलएम (LL.M.) की डिग्री हासिल की. न्यायिक सेवा में उनकी औपचारिक शुरुआत 31 मई 2003 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में हुई थी.

अपने दो दशकों से अधिक लंबे करियर के दौरान उन्होंने यूपी के कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने गाजीपुर, सुल्तानपुर, अलीगढ़ और गोरखपुर में सिविल जज, एसीजेएम (ACJM), और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के रूप में काम किया. इसके बाद अप्रैल 2014 में उनकी तैनाती कानपुर नगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में हुई.

वो कानपुर में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव एवं अपर विधि परामर्शदाता (विधायी) के पद पर भी प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके अलावा, वह लखनऊ स्थित राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष भी रहे. नवंबर 2024 में उन्हें मिर्जापुर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया था.

सनसनीखेज नीला ड्रम केस-
इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थानांतरण अधिसूचना के बाद, 21 मई 2026 से अरविंद कुमार मिश्रा-II मेरठ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में तैनात हैं. मिर्जापुर से ट्रांसफर होकर मेरठ आने के महज कुछ ही महीनों के भीतर उनके पाले में देश का यह सबसे सनसनीखेज 'नीला ड्रम हत्याकांड' आया.
इस मामले में 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया गया था, और अब 14 अक्टूबर 2026 को जज अरविंद कुमार मिश्रा-II ने दोनों को फांसी की सजा सुनाकर न्याय का एक कड़ा संदेश दिया है. उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2031 है. अपनी सख्त कार्यशैली और निष्पक्ष फैसलों के लिए जाने जाने वाले जज मिश्रा का यह फैसला भारतीय न्याय जगत में एक मिसाल बन गया है.

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