केंद्र सरकार की योजना यानी मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार देना है. इस योजना के तहत हर परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है. लेकिन ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर ब्लॉक स्थित ग्राम गुमसानी से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है.
ग्रामीणों ने खोली मनरेगा की पोल
ग्राम गुमसानी के ग्रामीणों ने मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में काम दिखाया गया, लेकिन जमीन पर कोई कार्य हुआ ही नहीं. जहां काम हुआ ही नहीं, वहां शिलापट लगाकर सरकारी धन निकाल लिया गया.
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
जब इस पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्ट की गई तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए. ग्रामीणों ने बताया कि रोजगार देने के नाम पर मजदूरों को काम नहीं दिया गया. इसके बजाय जेसीबी मशीन से कार्य कराकर मजदूरी के पैसे निकाल लिए गए. यही नहीं, एक ही फोटो को अलग-अलग जगह अपलोड कर भुगतान किया गया.
रजिस्टर में बाहरी मजदूरों के नाम
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा रजिस्टर में प्रतिदिन 100 से 150 मजदूरों से काम कराने की एंट्री की गई है. जबकि हकीकत में गांव के जॉब कार्ड धारक मजदूरों को कोई काम नहीं दिया गया. रजिस्टर में बाहरी मजदूरों के नाम और पते दर्ज कर दिए गए.
एनएच-74 और स्कूल के पास JCB से कराया गया काम
ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा के तहत एनएच-74 मुड़िया अनी और मदर इंडिया स्कूल के पास जेसीबी से कार्य कराया गया. इस काम का वीडियो भी ग्रामीणों के पास मौजूद है. आरोप है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया.
काम मांगने पर मजदूरों को लौटाया गया
ग्राम गुमसानी के मनरेगा जॉब कार्ड धारकों ने जब काम देने का अनुरोध किया तो उन्हें साफ मना कर दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि योजना मजदूरों के लिए बनी है, लेकिन यहां इसे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया है.
जांच की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे घोटाले आगे भी जारी रहेंगे और वास्तविक मजदूरों को उनका हक नहीं मिल पाएगा.
(रिपोर्ट- रमेश चंद्र)
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