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Mirzapur News: 1985 में हुई स्कूल की स्थापना, लेकिन अभी भी मुश्किल से स्कूल पहुंच रहे छात्र-शिक्षक, किचड़-खेतों से होकर जाने को मजबूर

जितनी जरूरी बच्चों के लिए शिक्षा है, उतना ही जरूरी है कि वह विद्यालय पहुंच पाएं. लेकिन मिर्ज़ापुर के एक विद्यालय में हाल यह है कि बच्चों से लेकर शिक्षकों को किचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ता है. वहां कोई पक्का रास्ता मौजूद नहीं है जिससे उनका स्कूल पहुंचना आसान हो सके.

धरना देते छात्र
सुरेश कुमार सिंह
  • मिर्ज़ापुर,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में कंपोजिट विद्यालय पहुचंने के लिए रास्ता नही होने के कारण पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षको को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस परेशानी को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने स्कूल के सामने धरना-प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल रहे है.

1985 में हुई स्थापना, पर रास्ता अभी तक बना नहीं

मामला सीटी ब्लाॉक के चेरूईराम कंपोजिट विद्यालय का है. विद्यायल की स्थापना 1985 में हुई थी. लेकिन शिक्षा के लिए छात्रों का इस विद्यालय तक पहुंच पाना अभी भी किसी मुश्किल से कम नहीं है. दरअसल बच्चों और शिक्षकों को खेतों से होकर हर मौसम में विद्यालय पहुंचना पड़ता है. 

वाहन से आना भी है एक मुश्किल 

किसी वाहन से विद्यालय आने वालों के लिए भी, विद्यालय से एक किलोमीटर दूर पहले वाहन खड़ा करना पड़ता है. बच्चे जिन लोगों के खेतों से होकर विद्यालय पहुंचते हैं, उन लोगों का भी कहना है कि ऐसा करने से फसल को नुकसान पहुंचता है.

24 घंटे में समाधान का मिला आश्वासन

इस परेशानी को लेकर ग्रामीण पहले भी धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, मगर आश्वासन से उन्हें हर बार टाल दिया जाता है. इस बार के धरना-प्रदर्शन की सूचना मिलने पर ABSA और तहसीलदार मौके पर पहुंचे. जिसके बाद उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की. साथ ही 24 घंटे में परेशानी को दूर करने की बात कही.

ग्रामीण तय हुए अपनी 5 फीट जगह देने को

ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बनी सहमति में आज कुछ ग्रामीणों ने अपनी जमीन में से 5 फीट का रास्ता देने पर सहमति जताई है. ग्रामीणों का कहना है बच्चे और शिक्षक कीचड़ में से हो कर इस विद्यालय में पहुचते है. जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

वही बीएसए अनिल वर्मा का कहना है कि विद्यालय के चारों तरफ काश्तकारों की जमीन है. काश्तकार जमीन देने के लिए राजी नही है. मगर जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा.

 

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