आसमान से गायब हुए बादल, देश में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात

देश में औसत से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई है. यह स्थिति सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है.

Monsoon Crisis
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • भारत में गहराया मानसून संकट
  • 40% तक कम हुई बारिश

देश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने चिंता बढ़ा दी है. जून के बीच तक पहुंचते-पहुंचते हालात ऐसे बन गए हैं कि देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में औसत से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई है.

सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाई असली तस्वीर
17 जून की INSAT-3DS सैटेलाइट इमेज में मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के अंदरूनी क्षेत्र लगभग बादल रहित दिखाई दिए. यह दृश्य सामान्य मानसून पैटर्न से बिल्कुल अलग है, जहां इस समय तक घने बादल और बारिश की सक्रियता होनी चाहिए. इसके उलट बादलों की गतिविधि केवल बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर भारत और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों तक सीमित रह गई है.

कई राज्यों में हालात और भी गंभीर हैं. महाराष्ट्र में 79% कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि गुजरात में यह आंकड़ा 98% तक पहुंच गया है. झारखंड, छत्तीसगढ़ और मेघालय जैसे राज्य भी गंभीर बारिश की कमी झेल रहे हैं.

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर?
महाराष्ट्र: 79% बारिश की कमी
गुजरात: 98% की भारी गिरावट
झारखंड: 66% कमी
छत्तीसगढ़: 65% कमी
मेघालय: 85% कमी
इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, बिहार और असम में भी बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है.

मानसून क्यों और कहां अटका? 
इस बार मानसून की गति कई बड़े वायुमंडलीय कारणों से धीमी पड़ गई है. अरब सागर से नमी का प्रवाह कमजोर हो गया है. ऊपरी वायुमंडलीय हवाएं बारिश बनने वाले सिस्टम को रोक रही हैं. मानसून का उत्तर की ओर बढ़ना लगभग थम गया है. इसी वजह से देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में बारिश देने वाले सिस्टम विकसित नहीं हो पा रहे हैं.

क्यों सिर्फ कुछ हिस्सों में ही बारिश हो रही है?
सैटेलाइट डेटा से एक और अजीब पैटर्न सामने आया है. जहां एक तरफ भारत का मुख्य भूभाग लगभग सूखा दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी अरब सागर में बादलों और बारिश की गतिविधि ज्यादा सक्रिय है. यह असमान वितरण मानसून के पूरे देश में फैलने में बाधा बन रहा है.

कृषि पर सीधा खतरा, जून है सबसे अहम महीना
बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी नहीं बन पा रही है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो बुवाई में देरी, उत्पादन में कमी और किसानों की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है.

क्या मानसून लौटेगा?
मौसम विभाग और फोरकास्ट मॉडल्स के अनुसार 21 जून के बाद नमी का प्रवाह फिर से बढ़ सकता है. इससे मानसून के दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद है. अगर जल्द बारिश नहीं लौटी तो जुलाई में इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिख सकता है.

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