जून के आखिर तक भी भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के लोगों के लिए राहत की खबर है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक करीब 1500 किलोमीटर लंबी मानसूनी ट्रफ बन गई है. INSAT-3DS सैटेलाइट की तस्वीरों में भी इस विशाल बादल पट्टी को देखा गया है.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यही सिस्टम अब उत्तर भारत में मानसून को रफ्तार देगा. अगर सब कुछ अनुमान के मुताबिक रहा तो 1 से 4 जुलाई के बीच दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है.
सैटेलाइट तस्वीर में क्या दिखा?
INSAT-3DS सैटेलाइट से मिली तस्वीर में बंगाल की खाड़ी से लेकर पूर्वी भारत, उत्तर प्रदेश, बिहार और हिमालयी राज्यों तक घने बादलों की लंबी पट्टी दिखाई दे रही है. यह करीब 1500 किलोमीटर लंबा बादलों का बेल्ट है, जो मानसून के मजबूत होने का संकेत माना जाता है. यह तस्वीर बताती है कि पिछले लगभग तीन हफ्तों से धीमी गति से आगे बढ़ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब फिर से एक्टिव होने लगा है.
क्या होती है मानसूनी ट्रफ?
मानसूनी ट्रफ को आसान भाषा में समझें तो यह कम वायुदाब (Low Pressure) की एक लंबी रेखा होती है. यही मानसून की रीढ़ मानी जाती है. यह ट्रफ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी हवाओं को भारत के अंदर तक खींचकर लाती है. जब यह अपने सामान्य स्थान पर होती है, तब उत्तर भारत के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश होती है. लेकिन जब यह हिमालय की तलहटी की ओर खिसक जाती है, तब बारिश पहाड़ी इलाकों तक सीमित रह जाती है और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे मैदानी इलाकों में गर्मी और उमस बनी रहती है.
इस बार जून में क्यों नहीं हुई अच्छी बारिश?
इस साल जून के अधिकांश दिनों में मानसूनी ट्रफ सामान्य स्थिति से काफी उत्तर में बनी रही. इसका असर यह हुआ कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच सकी. दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में लगातार तेज धूप, लू और उमस का दौर चलता रहा. कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें जरूर हुईं, लेकिन उससे मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं आया.
दिल्ली समेत कई शहरों में रिकॉर्ड गर्मी
सोमवार को दिल्ली के सफदरजंग में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली रिज इलाके में पारा 43.4 डिग्री तक पहुंच गया. हरियाणा के रोहतक में तापमान 43.5 डिग्री रहा. वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर में पारा 45.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र में सबसे अधिक रहा. तेज गर्मी के साथ हवा में नमी भी बढ़ गई, जिससे लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्मी महसूस हुई. मंगलवार को बारिश कामौसम तो बना हुआ है लेकिन उमसकी वजह से लोग परेशान हैं.
अब आगे क्या होगा?
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मानसूनी ट्रफ हिमालय की तलहटी के पास है, लेकिन आने वाले दिनों में यह धीरे-धीरे दक्षिण की ओर अपने सामान्य स्थान पर पहुंचेगी. जैसे ही ऐसा होगा, उत्तर भारत में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी.
इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में इस सप्ताह के आखिर तक एक नया लो-प्रेशर एरिया बनने की संभावना भी जताई गई है. यह सिस्टम मानसूनी हवाओं को और मजबूत करेगा तथा उत्तर भारत में बड़ी मात्रा में नमी पहुंचाएगा.
किन राज्यों में होगी ज्यादा बारिश?
दिल्ली-एनसीआर
पंजाब
हरियाणा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश
राजस्थान के कई हिस्से
उत्तराखंड
हिमाचल प्रदेश
जम्मू-कश्मीर
दिल्ली में कब पहुंचेगा मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि वर्तमान मौसम प्रणाली इसी तरह सक्रिय रही, तो दिल्ली में जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की एंट्री हो सकती है. हालांकि अगले एक-दो दिन कहीं-कहीं प्री-मानसून बारिश देखने को मिल सकती है, लेकिन लगातार बारिश की संभावना सप्ताह के मध्य से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है.
क्या मिलेगी गर्मी और उमस से राहत?
बारिश शुरू होने के बाद अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. साथ ही लंबे समय से जारी लू का दौर भी खत्म होगा. हालांकि शुरुआती बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ने से कुछ समय तक उमस बनी रह सकती है. लेकिन लगातार बारिश होने पर मौसम काफी सुहावना हो जाएगा.
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